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झोली में ऑस्ट्रेलियाई ओपन

Sun, 29 Jun 2014 07:35 PM IST
नई दिल्ली
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देश की शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल की ऑस्ट्रेलियाई ओपन सुपर सीरीज में धमाकेदार जीत इतनी बड़ी उपलब्धि है कि विश्व कप फुटबॉल की खुमारी में डूबे होने के बावजूद यह मुल्क इसकी अनदेखी नहीं कर सकता। सेमी फाइनल में दूसरे नंबर की वरीयता प्राप्त चीनी दिग्गज शिजियान वांग को साइना ने जिस तरीके से परास्त किया, उसके बाद ही यह साफ हो गया था कि उनकी झोली में एक और अंतरराष्ट्रीय खिताब बस आने वाला है।
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इसकी वजह यह थी कि फाइनल में जिस कैरोलिना मैरीन से उनका मुकाबला था, वह न सिर्फ उम्र, बल्कि अनुभव और रैंकिंग में भी उनसे कमतर थीं। और निर्णायक मैच में अपने ट्रेडमार्क स्मैश, बेहतरीन वॉली के जरिये उन्होंने जता दिया कि उन्हें बैडमिंटन की सनसनी यों ही नहीं कहा जाता।

हालांकि यह सही है कि पिछले करीब दो वर्षों से उनका प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं था, खासकर कई मौकों पर चीनी खिलाड़ियों ने ही उनका रास्ता रोक दिया। और इस साल तो सैयद मोदी ग्रां पी टूर्नामेंट में जीत ही उनकी इकलौती उपलब्धि थी। पर साइना नेहवाल एक ऐसी शख्सियत हैं, जो हर विफलता की धूल झाड़कर जीत के लिए कोर्ट में उतरती हैं। यह खेल उनके खून में तो खैर है ही, कड़ी मेहनत और अनुशासन के बूते भारतीय बैडमिंटन को उन्होंने एक ऐसी आक्रामक शैली दी है, जो इससे पहले नजर नहीं आती थी।
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प्रकाश पाडुकोण और पुलेला गोपीचंद के नक्शे कदम पर चलने के बावजूद साइना की उपलब्धियां उनसे कहीं अधिक हैं-उनसे पहले किसी ने ओलंपिक में भारत को बैडमिंटन में पदक नहीं दिलवाया था। नई दिल्ली में आयोजित पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में बैडमिंटन के सिंगल्स में स्वर्ण उनके हिस्से में आया था, तो पिछले साल से शुरू हुए इंडियन बैडमिंटन लीग की चैंपियन भी उन्हीं की टीम है।

चार साल पहले रैंकिंग में दूसरे नंबर तक पहुंच चुकीं साइना नेहवाल ने बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय क्षितिज में भारत को अभूतपूर्व पहचान तो खैर दिलाई ही है, बैडमिंटन आज देश में क्रिकेट के बाद दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल बन गया है और इसमें पी वी सिंधु और पारुपल्ली कश्यप जैसे कई संभावनाशील खिलाड़ी हाल के वर्षों में तेजी से उभरकर सामने आए हैं, तो इसके पीछे साइना नेहवाल का योगदान सर्वाधिक है। उम्मीद करनी चाहिए कि यह जीत साइना नेहवाल को नई उम्मीदों से भर देगी।
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