यूं तो बच्चे को जन्म देना किसी भी महिला की नितांत निजी और स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद संवेदनशील मसला है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पुराने जमाने में रानी महारानियों को भीड़ के सामने अपने बच्चे को जन्म देना पड़ता था।
इतिहास गवाह है कि यूरोप की राजशाही में सभी रानियों ने शाही बच्चों को भीड़ के सामने जन्म दिया। इस भीड़ में शाही परिवार ही नहीं बल्कि सरकार के मंत्री, न्यायाधीश, राजनयिक, महल के नौकर चाकर और आम जनता भी शामिल रहती थी।
फ्रांस, ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया समेत सभी राजशाही मुल्कों में यह नियम था कि महारानी की प्रसव पीड़ा और डिलीवरी सार्वजनिक तौर पर होगी। इतना ही नहीं डिलीवरी इतनी सार्वजनिक होती थी कि जनता और रानी के पलंग के बीच एक झीना परदा तक नहीं होता था। सोचिए किसी महारानी के लिए कितना अपमानजनक होता होगा कि सभी मंत्री और महल के नौकर उन्हें बिना कपड़ों के प्रसव पीड़ा झेलते देखें।
इसके पीछे का तर्क था कि शाही बच्चे के जन्म के समय कोई षडयंत्र न हो पाए, कहीं विरोधी बच्चा बदल न दे या मार न दें। अगर बच्चा मरा पैदा होता है तो कहीं गलती डॉक्टर की तो नहीं। यही देखने के लिए शाही मेहमान के जन्म के समय गवाहों के तौर पर इतनी भीड़ एकत्र हो जाती थी कि संभालना मुश्किल हो जाता था।
लोगों की भीड़ रानी पर नजर गढ़ाए बच्चे को प्रसव से बाहर आता देखती और लड़के के जन्म लेने पर इतनी तेज चिल्लाती कि कई बार रानी बेहोश हो जाती थी। लड़की के जन्म के समय जनता के बीच मायूसी छा जाती और रानी से कहा जाता 'आपने जनता को मायूसी दी है'।
जब बेहोश हो गई रानी मैरी एंटोनियो
फ्रांस के अंतिम राजा लुइस सोलहवें की पत्नी रानी मैरी एंटोनियों ने जब अपने पहले बेटे पीटर को जन्म दिया तो लोगों की भीड़ उनके पलंग पर ऊपर तक चढ़ आई थी। ये नजारा देखकर रानी बेहोश हो गई। फ्रांस में लगभग 16 शाही बच्चों का जन्म जनता के बीच हुआ। रानी महल के जिस हॉल में बच्चे को जन्म देती थी उसे वर्साइलीज कहा जाता था।
फ्रांस में लुई पंद्रहवें के जन्म के समय राज्य के सभी मंत्री रानी लेज्यांस्का के पलंग के बिलकुल बराबर में सोफा डालकर बैठ गए थे। वो भी उस समय जब राजा महल के बाहर निकल कर जनता को बाहर बच्चे के जन्म का अपडेट देने गए थे।
रानी एंटोनियों के बेहोश होने के बाद नियम में बदलाव हुआ और आम जनता का रानी के प्रसव पीड़ा और डिलीवरी को देखने पर रोक लगी। लेकिन तब भी राज्य के मंत्री और काउंसलर बच्चे के जन्म के समय डिलीवरी रूम में रहा करते थे।
अगस्त 1930 में ब्रिटेन में प्रिंस चार्ल्स के जन्म के समय भी शाही काउंसलर डिलीवरी रूम में मौजूद थे। इसके कुछ साल बाद 1948 में राजशाही में नया नियम बना जिसके अनुसार शाही बच्चे महल के बजाय शाही अस्पताल में जन्म लेंगे और उस दौरान बाहरी व्यक्ति वहां मौजूद नहीं रहेंगे।
डिलीवरी के वक्त पेनकिलर मांगना था अपराध, मिलती थी खौफनाक सजा
राजशाही के उस दौर में भयंकर और जानलेवा प्रसव पीड़ा के दौरान पैनकिलर की मांग करना अपराध था जिसके एवज में प्रसव पीड़ा झेल रही औरत को जिंदा जला दिया जाता था। रानियां बिना किसी पेन किलर के सार्वजनिक तौर पर प्रसव पीड़ा झेलती थी और कई बार अत्यधिक प्रसव पीड़ा के चलते रानी की मौत तक हो जाती थी।
1817 में जार्ज चतुर्थ के जन्म के समय 50 घंटों तक प्रसव पीड़ा के चलते मात्र 21 साल की उम्र में क्वीन शैरलेट की मौत हो गई। रानी ने प्रिंस लियोपोल्ड से पेन किलर मांगे लेकिन राजशाही के नियम के चलते उन्हें कोई राहत की दवा नहीं दी गई और रानी के गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई, कुछ ही घंटों बाद रानी की भी मौत हो गई।
प्रिंस एडवर्ड सांतवे के जन्म के दौरान रानी विक्टोरिया ने 12 घंटों तक प्रसव पीड़ा झेली थी। उसके बाद रानी विक्टोरिया ने प्रिंसेज बेट्रीज को जन्म दिया और विक्टोरिया के कहने पर डॉक्टरों ने प्रसव पीड़ा को कम करने के लिए उन्हें एक रूमाल में रखकर क्लोरोफार्म सुंघाया।
दरअसल तब माना जाता था कि महिला प्रसव पीड़ा नहीं एक पवित्र प्रक्रिया से गुजर रही है और अगर पेन किलर दिया गया तो वो प्रक्रिया अपवित्र हो जाएगी। इस दौरान लाखों महिलाओं की मौत हुई लेकिन पेन किलर नहीं दिया जाता था।