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पंजाब का संकट

Fri, 23 Oct 2015 07:54 PM IST
नई दिल्ली
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अभी तबाह हुई फसल के कारण पंजाब के कपास उत्पादक किसानों का आंदोलन खत्म भी नहीं हुआ था कि पवित्र धर्मग्रंथ के अपमान की घटनाओं ने सूबे को गुस्से और क्षोभ से भर दिया है। जिस तरह कई जगह ऐसे मामले सामने आए हैं, उनसे साफ है कि यह राज्य को हिंसा की आग में झोंकने की सोची-समझी साजिश है। हालत यह है कि त्योहारों के इस सीजन में कारोबार ठंडा पड़ा है।
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अलबत्ता बादल सरकार ने पवित्र धर्मग्रंथ का अपमान करने के पीछे जिस तरह विदेशी ताकतों का हाथ बताया है, उस पर पूरी तरह यकीन करना मुश्किल है। बाहरी ताकतों के बारे में मिली खुफिया सूचनाओं को बेशक सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। इस साल की दो घटनाओं के बाद तो कतई नहीं। एक तो ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, पाकिस्तान समेत कई देशों में ऑपरेशन ब्लू स्टार की जिस तरह बरसी मनाई गई, वह कट्टरवादियों के एकजुट होने का उदाहरण है। इसके अलावा वर्षों बाद आतंकवादियों ने इस साल पंजाब को जिस तरह निशाना बनाया, उसे भी हल्के में नहीं लिया जा सकता।

लेकिन यह मानने का कारण है कि पंजाब का मौजूदा संकट उसकी आंतरिक वजहों से ही ज्यादा गहराया है। हरित क्रांति का केंद्रबिंदु रहा यह राज्य आज किसानों की आत्महत्या के लिए ज्यादा जाना जाता है, तो नशे ने सूबे के युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत सिंह राम रहीम को पहले दी गई माफी, फिर समाज के कुछ हिस्से की नाराजगी को देखकर माफी वापस लेने का फैसला मौजूदा संकट से सीधा जुड़ा हुआ नहीं भी हो सकता है, पर इससे लोगों के बीच बनी बादल सरकार की छवि बहुत कुछ कह जाती है।
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जो सूबा अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बेहद संवेदनशील है, वहां की सरकार को पहले से ही सजग होना चाहिए, और संकट के समय मजबूत इरादों का परिचय देना चाहिए। जब ठीक इसी समय देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिशें देखी जा रही हैं, तब पंजाब सरकार से जिम्मेदार रवैये की उम्मीद की जाती है। लिहाजा बेहतर यही होगा कि सरकार जल्दी से जल्दी वैसे तत्वों की शिनाख्त करे, जो समाज को बांटने की खतरनाक साजिश रच रहे हैं।
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