बीते रविवार को भारतीय शटलर किदंबी श्रीकांत और साइना नेहवाल ने चीन में जो कारनामा कर दिखाया, उसकी प्रतीक्षा देश के बैडमिंटन प्रेमियों को लंबे समय से थी। चाइना ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर में खासतौर से जिस तरह हैदराबाद के 21 वर्षीय श्रीकांत ने पांच बार के विश्व चैंपियन और दो बार के ओलंपिक विजेता लिन तान को शिकस्त दी, उसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
यह उपलब्धि सिर्फ इसलिए बड़ी नहीं है, कि यह श्रीकांत की पहली बड़ी खिताबी जीत है, या कुछ समय की सुस्ती के बाद साइना ने कोर्ट में वापसी की है। बल्कि इसलिए कि इन दोनों शटलरों ने चीनी खिलाड़ियों को उनकी जमीन पर ही धूल चटाई है। भारत के पूर्व दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की इस टिप्पणी से इस जीत का महत्व समझा जा सकता है कि 'चीनियों को भी परास्त किया जा सकता है'!
दुनिया के सर्वकालिक श्रेष्ठ शटलरों में शुमार किए जाने वाले लिन तान को श्रीकांत ने दो सीधे सेटों पर पराजित कर अपना लोहा मनवाया है। मुश्किल से छियालीस मिनट चले खेल में श्रीकांत ने अपनी शानदार ड्रिबल और ताकतवर स्मैक से तान को पस्त कर दिया। जबकि महज चार महीने पहले श्रीकांत मस्तिष्क ज्वर से गंभीर रूप से पीड़ित हो गए थे और तब कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि वह इतनी जल्दी कोर्ट में लौटेंगे। मगर संभवतः उनके गुरु और उनसे कोई दशक भर पहले तान को पराजित करने वाले दूसरे भारतीय पुलेला गोपीचंद को उन पर भरोसा था।
जहां तक साइना की बात है, तो वह अभी दुनिया की पांचवें नंबर की खिलाड़ी हैं, और इस जीत के जरिये उन्होंने अपनी झोली में आठवां प्रीमियर सुपर खिताब डाला है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने फाइनल में जापान की अकेनी यामागुची को हराने से पहले तीन चीनी खिलाड़ियों को भी शिकस्त दी थी। इसके बावजूद अब भी भारत के पास प्रकाश पादुकोण, पुलेला गोपीचंद, साइना और श्रीकांत जैसे कुछ ही नाम हैं, जिन्होंने एकल मुकाबलों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में देश का नाम रोशन किया है।
हालांकि देश में बैडमिंटन को जैसी तवज्जो मिलनी चाहिए, वह अभी नहीं मिली है। वाकई श्रीकांत और साइना की इस जीत से विश्व बैडमिंटन में चीन के वर्चस्व को कड़ी चुनौती तो मिली ही है, इसने भारत के युवा बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए संभावनाओं का नया फलक भी खोल दिया है।