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काले धन पर किरकिरी

Sun, 11 Oct 2015 07:47 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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देश की राजधानी में सरकार और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर नजर रखने वाली एजेंसियों की नाक के नीचे से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की एक शाखा से 6,100 करोड़ रुपये से भी अधिक राशि विदेश भेजने का मामला बेहद चौंकाने वाला है। पता यह चलता है कि बैंक ऑफ बड़ौदा की अशोक विहार शाखा में अचानक 59 चालू खाते खोले गए, जिनके जरिये एक-एक दिन में चार से पांच बार बड़ी धनराशि हांगकांग भेजी गई। इस साल बैंक की ऑडिट रिपोर्ट में अशोक विहार शाखा के फॉरेक्स खाते में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज किए जाने पर वित्त मंत्रालय को जानकारी दी गई, तब यह मामला सामने आया।
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रिपोर्ट में पाया गया कि फॉरेक्स खाते में वर्ष 2014-15 में 21,519 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले करीब पांच सौ गुना अधिक था! बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर यह संभव ही नहीं था। बैंक ने इतनी बड़ी नकदी स्वीकार करने के एवज में जमाकर्ताओं से कोई सुबूत नहीं लिया था। आयात के नाम पर एक साल तक पैसा बाहर भेजने का सिलसिला चलता रहा, पर बैंक आंख मूंदे रहा। अब जब मामले की जांच शुरू हुई, तो खातेदारों के पते भी फर्जी पाए गए।

यह घटना संबंधित बैंक और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर नजर रखने वाली एजेंसियों की नाकामी का सुबूत तो है ही, काले धन पर लगाम लगाने की बात करने वाली केंद्र सरकार के लिए भी यह बड़ा झटका है। सत्ता में आने के बाद उसने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर काले धन पर एक उच्च स्तरीय समिति गठित की। पर इस मुद्दे पर उसे पिछले दिनों भी बड़ी नाकामी मिली, जब काले धन की स्वैच्छिक घोषणा की योजना शुरू करने के बावजूद उसे 4,147 करोड़ रुपये ही हासिल हुए। यानी सख्त दंड का प्रावधान भी काला धन रखने वालों को डरा नहीं पाया।
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अब यह नया मामला भी उस सरकार की छवि के लिए नुकसानदेह है, जो विदेश में जमा काला धन वापस लाने की गंभीरता का दावा कर रही है। यह ठीक है कि यह मामला सामने आने के बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के साथ सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस जैसी एजेंसियां सक्रिय हुईं, पर इससे काले धन से जुड़े सामूहिक नाकामी का क्षोभ जरा भी कम नहीं होता।
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