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दोस्ती का बढ़ता दायरा

Tue, 18 Nov 2014 08:30 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न केवल शानदार संचारक हैं, बल्कि मौके की नजाकत को भी बखूबी समझते हैं। उनकी यह खूबी ऑस्ट्रेलिया में भी नजर आई, जहां उन्होंने प्रवासी भारतीयों से लेकर निवेशकों और सांसदों तक को लुभाने में किसी तरह की कमी नहीं की।
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बेशक, वह राजीव गांधी के बाद 28 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया जाने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं, मगर भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारतीय छात्रों पर हुए हमलों जैसे अपवाद को छोड़ दें, तो सहज ही रहे हैं। बल्कि बीते एक वर्ष में इसमें तेजी ही आई है, जिसका पता इससे चलता है कि ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा के लिए भारत को यूरेनियम देने के लिए तैयार है। सितंबर में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन अभी यूरेनियम आपूर्ति पर बात पूरी तरह बनी नहीं है।

असल में मोदी की यात्रा के दौरान यह एक अहम मुद्दा था, जिस पर सबकी नजर थी। इस पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और संभवतः अगले वर्ष तक इस दिशा में सकारात्मक प्रगति होगी, जिसका संकेत खुद एबॉट ने दिया है। मोदी के प्रवास के दौरान ऑस्ट्रेलिया के साथ जिन पांच समझौतों को अंजाम दिया गया, उनमें सामाजिक सुरक्षा, कैदियों की अदला-बदली, नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने और पर्यटन, कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने से संबंधित समझौते शामिल हैं। जाहिर है, दोनों देशों के बीच ये समझौते पुल का काम करेंगे।
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मगर, गौर करने वाली बात यह भी है कि इसी दौरान चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुक्त व्यापार समझौता हुआ है। यही नहीं, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अभी सालाना 15 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जो चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले व्यापार का महज दसवां हिस्सा है! मोदी और एबॉट ने दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को दोनों की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी बताया है।

दोनों नेताओं के बीच बातचीत का एक अहम पहलू सुरक्षा संबंधी सहयोग के लिए व्यापक ढांचे के निर्माण के रूप में सामने आया है। मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित करते हुए समुद्री सुरक्षा को लेकर सहयोग की बात भी की है। वाकई हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियां सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया के लिए भी चिंता की बात होनी चाहिए।
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