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सरकार की छवि

Thu, 28 Aug 2014 07:55 PM IST
नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अगर अस्तित्व में आने के तीन महीने में ही विवादों में घिर जाए, तो उसमें और दूसरी सरकारों में भला फर्क क्या रह जाएगा! मतदाताओं ने पूर्ण बहुमत और उम्मीदों के साथ इस सरकार को केंद्र की सत्ता में पहुंचाया है, पर सौ दिन पूरे होने से ठीक पहले एकाधिक विवादों के सामने आने से सरकार की छवि ही खंडित हो रही है।
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दुर्योग से ये विवाद भाजपा के दो वरिष्ठ मंत्रियों के बेटे से संबंधित हैं। एक मॉडल और अभिनेत्री ने रेल मंत्री सदानंद गौड़ा के बेटे पर बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोप न सिर्फ लगाए हैं, बल्कि इनसे संबंधित धाराओं में उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। सच्चाई का पता तो खैर अदालत से ही चलेगा, लेकिन खुद उस अभिनेत्री ने संवाददाता सम्मेलन में जो कुछ कहा है, उसके बाद प्रथम दृष्टया इस मामले को खारिज कर देना कठिन है।

दूसरी ओर, गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह पर लगे आरोप को प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष ने भले ही खारिज कर दिया हो, पर इससे जो दूसरे कई सवाल पैदा होते हैं, वे ज्यादा गंभीर हैं। राजनाथ सिंह की ईमानदारी पर तो सवाल ही नहीं है। उनकी सत्यनिष्ठा का इससे बड़ा सुबूत और क्या होगा कि विरोधी नेता तक एक स्वर से उन्हें बेदाग छवि का बता रहे हैं। पर खुद गृह मंत्री ने अपने बेटे से जुड़ी अफवाह के पीछे अपने ही एक मंत्रिमंडलीय सहयोगी का हाथ जिस तरह बताया है, उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
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पंकज सिंह पर आरोप लगाकर कई निशाने एक साथ साधे गए हैं। मसलन, पैसों के कथित लेन-देने के मामले में उन्हें बुलाकर फटकार लगाना जहां प्रधानमंत्री के तानाशाही तौर-तरीके का खुलासा करता है, वहीं इससे यह भी पता चलता है कि मंत्रिमंडल में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले व्यक्ति की क्या स्थिति है।

दूसरे, जो व्यक्ति पिछले करीब एक दशक से राजनीति में सक्रिय हो, उसके बारे में ठीक उपचुनाव से पहले अफवाहें फैलाना उसके राजनीतिक करियर को बर्बाद करने के साथ-साथ उनके पिता की छवि खराब करने की मंशा से भी दुष्प्रेरित है। इससे पहले इस पर अटकल लगाई ही जा रही थी कि मंत्रिमंडल में नंबर दो कौन है। ये तथ्य अंदरूनी सत्ता संघर्ष की ओर ही इशारा करते हैं। भाजपा खुद को दूसरी राजनीतिक पार्टियों से अलग बताती आई है। पर ये विवाद कुछ और ही बता रहे हैं।
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