डरे डरे से केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सम विषम का फॉर्मूला हिट हो गया है। लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं हालांकि इससे दिल्ली का ट्रैफिक तो सुधर गया है लेकिन जैसा कि कहा जा रहा कि यह प्रदूषण कम करेगा, वैसा नहीं हुआ। प्रदूषण अब भी रिकॉर्ड पर है। केजरीवाल क्रेडिट लेने के लिए जाने जाते हैं लेकिन केजरीवाल इसको लेकर होहल्ला नहीं मचा रहे हैं। वह इस पर चुप्पी साधे हैं। उन्हें और उनके साथियों को इस फॉर्मूले के संभावित राजनीतिक नफे नुकसान का डर सता रहा है। उन्हें अभी तक जो फीडबैक मिला है, उसके अनुसार लोग इससे नाखुश हैं, यही वजह है कि केजरीवाल इसको लेकर चुप्पी साधे हैं। पत्रकारों को इसके कारण हो रही मुश्किलों का जिक्र आने पर वह कह रहे हैं कि 15 जनवरी तक किसी तरह काम चला लें।
हाईटेक हुआ संघ
राष्ट्रीय स्वयं संघ भी इन दिनों हाईटेक हो गया है और वह भी भव्य आयोजन करने लगा है। रविवार को पुणे में संघ ने एक भव्य आयोजन किया जिसकी तैयारी पिछले एक साल से चल रही थी। लगभग 100 एकड़ के मैदान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें एक लाख स्वयं सेवकों ने गणवेश में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में 70 फुट लंबा भगवा ध्वज फहराया गया, 200 फीट ऊंचा मंच था और इस पर चढ़ने के लिए लिफ्ट की व्यवस्था की गई थी। यह सब साज सज्जा शिवाजी सीरियल और फिल्म निर्माता नितिन देसाई की देखरेख में की गई। स्वयंसेवकों के खाना पुणे और आसपास के 80 हजार परिवारों से तैयार हो कर आया लेकिन यह पुराने तौर तरीकों वाला था। हर पैकेट में पाँच मसाला पूड़ी, अचार और मूंगफली की चटनी थी।
पठानकोट पर फंसी भाजपा
सत्ता पक्ष में रहने की क्या मजबूरी होती है, पठानकोट हमले के बाद भाजपा को यह महसूस हो रहा है। अब तक पार्टी पाकिस्तानी आतंकवादियों के हमले पर जमीन आसमान एक कर देती लेकिन पार्टी के नेता शांत हैं, कुछ नहीं कह पा रहे हैं। यहाँ तक कि सोशल मी़डिया में यह कहकर उनकी खिल्ली उड़ाई जा रही है कि यदि भाजपा विपक्ष में होती तो अब तक उसने पाकिस्तान पर हमला कर दिया होता। पुराने बयानों का हवाला देने पर भाजपा नेता परेशान नजर आ रहे हैं, उनसे कुछ खास कहते नहीं बन रहा है। राज्यवर्धन राठौर ने ऐलान किया था- हम अपनी मर्ज़ी के समय और ठिकाने पर आतंकवादियों के ख़िलाफ़ हमले करेंगे....लेकिन पठानकोट वायुसेना छावनी पर पाक आतंकवादियों के हमले से बचाव का रास्ता नहीं सूझ रहा है।