ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) एक मानसिक बीमारी है। यह इंसानों और कुत्तों दोनों में एक जैसे लक्षणों के साथ पाई जाती है।
इससे ग्रस्त व्यक्ति एक ही काम बार-बार करता है। पीड़ित व्यक्ति में जहाँ बार-बार हाथ धोने जैसे लक्षण मौजूद होते हैं वहीं कुत्तों में बार-बार अपनी पूंछ का या अपनी परछाईं का पीछा करने जैसे लक्षण देखे गए हैं।
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कुत्तों में पाया जाने वाला ओसीडी उन सैकड़ों बीमारियों में एक है, जो इंसानों में भी उसी रूप में मिलती हैं।
इंसानों में पाई जाने वाली कुछ अन्य बीमारियां जो कुत्तों में भी होती हैं वो हैं, मिर्गी, निद्रारोग, रक्तस्राव रोग, मांसपेशियों के विकास में विकार, रेटिना संबंधी विकार।
कुत्तों और इंसानों में एक जैसी बीमारियों का होना इंसानों में वंशानुगत बीमारियों की हमारी समझ बढ़ाने और नए उपचारों के लिए रास्ता साफ़ करने में सहायक हो सकता है।
उत्तरदायी जीन
हाल के अध्ययनों में उस जीन की पहचान की गई है, जो कुत्तों में इन लक्षणों के ज़िम्मेदार है।
उपसाला विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर कर्सटिन लिंडब्लै़ड तोह ने कहा, "इंसानों की तुलना में कुत्तों में बीमारी के लिए उत्तरदायी जीन को खोजना आसान है।"
इसका कारण यह है कि मनुष्य सैकड़ों सालों से कुत्तों का प्रजनन कराता आ रहा है।
विशिष्ट विशेषताओं वाले पिल्लों के लिए कुत्तों के प्रजनन के कारण बीमारी के लिए उत्तरदायी जीन एक ख़ास तरह की नस्ल में व्यापक रूप से पाई जाती है।
इससे साबित होता है कि एक नस्ल के कुत्ते आनुवांशिक रूप से समान होते हैं।
प्रोफ़ेसर लिंडब्लै़ड और उनके सहयोगियों ने जीनोम बॉयलॉजी में हाल ही में एक अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें ओसीडी से जुड़ी चार जीन के बारे में बताया गया है।
फिलहाल वे इन जीनों के इंसानों पर असर के बारे में अध्ययन कर रहे हैं।
यह पहले से मालूम है कि वातावरण का जीन पर प्रभाव पड़ सकता है, और इसलिए मानव रोग के लिए उत्तरदायी कोई भी जीन और वातावरण का पारस्परिक प्रभाव कुत्तों को भी प्रभावित कर सकता है।
अभी तक जीन संबंधी किसी भी अध्ययन के लिए शोधकर्ता चूहों के इस्तेमाल पर ही भरोसा करते रहे हैं।
मगर चूहों पर होने वाले अध्ययनों का दायरा सीमित है। चूहों की तुलना में कुत्ते जैसी जटिल संरचना वाले जानवर इंसानों की वंशानुगत बीमारी समझने में मदद कर सकते हैं।
कुत्ता जीन
हाल के अध्ययनों में उस जीन की पहचान की गई है जो कुत्तों में इंसानों जैसी बीमारियों के लक्षणों के लिए ज़िम्मेदार है।
शारीरिक रोगों की जांच के लिए कुत्ते के उपयोग ने पहले से ही हमारी समझ में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उदाहरण के लिए कुत्तों में ऊंघने की आनुवंशिक आधार की पहचान ने मस्तिष्क में नए अनजान रास्ते को खोज निकाला जबकि अन्य अध्ययनों ने हीमोफ़ीलिया के लिए एक नई जीन थेरेपी का विकास किया।
विशेषज्ञों की राय है कि पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली दवाएं मानव चिकित्सा के अध्ययन के लिए हो सकती है।
इन दोनों क्षेत्रों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की पहचान की जा रही है और शोधकर्ताओं द्वारा स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने के लिए चिकित्सा और पशु चिकित्सा को साथ लाने की पहल की जा रही है।