इन दिनों लीची खाने का लाख मन हो लेकिन लीची सिंड्रोम वायरस के डर से इसे हाथ लगाने से कतराते होंगे आप। पश्चिम बंगाल और बिहार में बढ़ते लीची सिंड्रोम के मामले के बाद इसके बारे में आप जरूर जानना चाहेंगे।
क्या है लीची सिंड्रोम
लीची सिंड्रोम एक प्रकार का वायरल संक्रमण है जो कच्ची लीची खाने पर हो सकता है। इस संक्रमण से पीड़ित मरीज को तेज बुखार, तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टियां व पेट में दर्द जैसे लक्षण होते हैं।
खाने से पहले रखें ध्यान
न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. गीतू अमरनानी के अनुसार, किसी भी फल को अप्राकृतिक तरीके से पकाकर खाने से इस तरह के संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है।
वह बताती हैं, ''कोई भी फल अपने मौसम के अनुरूप प्राकृतिक तौर पर ही फायदेमंद है और लीची कोई अपवाद नहीं है। कई बार बाजार में मिलने वाली लीची, कच्ची लीची को प्रिजर्वेटिव व केमिकल के जरिए पकाकर बेची जाती है, जो संक्रमण बढ़ा सकती है। बेहतर है कि आप पकी लीची को उसके मौसम में ही खाएं और बारिश से पहले इसे खाना छोड़ दें।''
कब खाएं, कब न खाएं
गीतू अमरनानी के अनुसार, ''लीची का मौसम दो से ढाई महीने का होता है। आमतौर पर अप्रैल के अंत से लेकर जून माह के अंत या जुलाई के पहले हफ्ते तक यह बाजार में उपलब्ध है। लेकिन बारिश से लीची में कीड़े लग जाते हैं इसलिए इन्हें पहली बारिश के पहले ही खाना सेहतमंद है।''
पोषक तत्व
गर्मियों के मौसम में लीची का सेवन बेहद पौष्टिक है। लीची में सबसे अधिक मात्रा में पानी और विटामिन सी है। गर्मियों में शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने और तुरंत ऊर्जा के लिए लीची का सेवन फायदेमंद है, बशर्ते आप पकी और अच्छी क्वालिटी की ही लीची खाएं।