फेसबुक या ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर अगर आप दिन-रात स्टेटस अपडेट करते हैं और अपनी प्रोफाइल फोटो को देखकर मन ही मन मुस्काते हैं तो सावधान हो जाएं, इसके प्रति अधिक झुकाव आपके व्यक्तित्व का दोष भी बन सकता है।
मिशिगन विश्वविद्यालय ने अपने शोध में माना है कि फेसबुक, ट्विटर जैसी नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर बहुत अधिक समय बिताने वाले लोग आत्ममुग्धता से ग्रसित हो जाते हैं।
शोध के अनुसार, ट्विटर पर ट्वीट किशोरों के लिए आत्ममुग्धता की बड़ी वजह है जबकि फेसबुक पर अधिकतर अधेड़ उम्र के लोग अपना अहम संतुष्ट करते हैं। शोधकर्ता इलियट पैनक के अनुसार, इन साइट्स पर अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते-करते लोग सिर्फ खुद को ही श्रेष्ठ समझने लगते हैं जिससे उनमें सिर्फ अपने ही बारे में सोचने, कहने और खुद को ही सराहने की प्रवृत्ति बहुत अधिक बढ़ी है। यह उनकी मानसिक स्थिति के लिए अलार्म है।
इसी तरह 'पर्सेनालिटी और इंडिविजुअल डिफ्रेंसेज' जर्नल में प्रकाशित एक-दूसरे शोध में यह पाया गया कि आत्ममुग्ध प्रवृत्ति के लोग अपने रुटीन का सबसे अधिक समय फेसबुक और ट्विटर जैसी वेबसाइट्स पर बिताते हैं।
हफपोस्ट की ब्लॉगर व मनोवैज्ञानिक लीज़ा फायरस्टोन मानती हैं कि सोशल नेटविर्कंग वेबसाइट्स का यह बदलता स्वरूप इशारा है हमारी मानसिक स्थिति में आते बदलाव का। जिस तरह नई पीढ़ी आत्ममुग्धता की ओर बढ़ रही है, यह उसके व्यक्तित्व संबंधी कई बड़ी समस्याओं का कारण हो सकता है।