सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी को 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित मामलों को बंद करने से जुड़ी विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट पर विरोध याचिका दायर करने की मंजूरी दे दी।
एसआईटी ने गुजरात दंगों से संबंधित गुलबर्ग सोसाइटी कांड का मामला बंद करने और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित क्लीन चिट देने संबंधी रिपोर्ट दी थी। अहमदाबाद की इस सोसाइटी में 28 फरवरी, 2002 को हुए दंगे में एहसान जाफरी सहित 69 व्यक्ति मारे गए थे।
जस्टिस पी सदाशिवम, जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने कहा कि जाकिया को इस मामले से संबंधित एसआईटी की पूरी जांच रिपोर्ट मुहैया कराई जाए। ताकि वह अदालत में विरोध याचिका दायर कर सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि एसआईटी के मुखिया की टिप्पणियों के बगैर ही यह रिपोर्ट जाकिया को दी जाए। वह यह सामग्री मिलने के दो महीने के भीतर विरोध याचिका दायर कर सकती हैं।
पीठ ने कहा कि जाकिया 12 मई, 2010 को सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश पूरी रिपोर्ट प्राप्त करने की हकदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट को भेज दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद की अदालत के 16 जुलाई और 27 नवंबर के आदेश निरस्त कर दिए। सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जाकिया की शिकायत पर जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों को अपराध प्रक्रि या संहिता की धारा 161 के तहत दर्ज बयान माना जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच के दौरान दर्ज बयानों का सिर्फ मामला बंद करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर फैसला करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा आदेश सिर्फ जाकिया की शिकायत तक ही सीमित है जो 8 जून, 06 को दायर की गई थी और जिसमें 2002 के दंगों के सिलसिले में नरेंद्र मोदी तथा दूसरे व्यक्तियों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी। गुजरात के अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता का कहना था कि राज्य सरकार इस मामले में प्रतिपक्ष की भूमिका में नहीं है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल ने नौ मामलों की जांच की थी और इसमें से छह में सजा हुई है।