गुजरात का यह सम्भवत: पहला चुनाव है, जिसमें कोई बड़ा राजनीतिक मुद्दा जनता के सामने नहीं है। कांग्रेस प्रथम चरण मतदान के अंतिम दिन तक कोई ऐसा मुद्दा खड़ा नहीं कर पाई, जिससे जनता जुड़ सके। जबकि वर्ष 1985 से लेकर पिछले विधानसभा चुनाव तक सहानुभूति व हिन्दुत्व जैसी लहर, राम जन्मभूमि व गोधरा मुद्दा छाया रहा था।
उल्टा, कांग्रेस पूरे प्रचार के दौरान बैकफुट पर रही, कांग्रेस ने अपने स्टार राहुल गांधी को भी प्रचार थमने के अंतिम दिन जनता के बीच हाजिर किया। इधर, भाजपा ने विकास और शांति को प्रचार का मुद्दा बनाया। रोचक यह रहा कि मोदी ने पूरे चटखारे के साथ अपनी सभाओं में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के भाषणों के जवाब दिए, जिस पर खूब ठहाके लगे।
युवाओं व महिलाओं ने दिखाई भागीदारी
प्रथम चरण के मतदान में युवाओं और महिलाओं ने खासी भागीदारी निभाई है। बिना मुद्दे व लहर के वोटिंग प्रतिशत को बढ़ाने में इस वर्ग का खासा रोल रहा। सुबह से लेकर शाम तक समूह व परिवार के साथ युवा और महिलाओं ने लोकतंत्र के इस यज्ञ में वोट डालकर आहुति दी। खास उत्साह उनमें था, जो पहली बार वोट डालने का अनुभव ले रहे थे।
जनता ने दी शाबासी या लगाई क्लास
वोट के लिए लोगों के घर से निकलने के इस अंदाज ने भाजपा या कांग्रेस सभी दलों को चौंका दिया है। किसी भी दल को यह उम्मीद ही नहीं थी कि पिछले वर्ष के मुकाबले वोटिंग नौ प्रतिशत से अधिक हो जाएगी। अब सत्तारूढ़ दल भाजपा में अंदरखाने ये बाते होने लगी हैं कि जनता के बढ़े हुए मत को शाबासी के रूप में लिया जाए या नाराजगी के साथ बेदखल करने के लिए लगाई गई क्लास।