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बाजार में बिक रही हैं आपकी बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारियां

Tue, 12 Aug 2014 09:56 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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देश के बैंकों और मोबाइल कंपनियों के पास मौजूद ग्राहकों की गोपनीय और संवेदनशील जानकारियां चोरी हो रही हैं। ये जानकारियां बाजार में बेची जा रही हैं। गोपनीय जानकारियों का एक बड़ा बाजार देश में बन चुका है। विदेशी मुल्क से लेकर साइबर अपराधियों तक ये सारी जानकारियां पहुंच रही हैं। इस बात का खुलासा न्यूज चैनल लाइव इंडिया ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया है।
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लाइव इंडिया ने दावा किया है कि उसके स्टिंग ऑपरेशन में कैमरे में ऐसे 12 कारोबारी कैद है। खुद लाइव इंडिया के पास करीब 10 करोड़ बैंक और टेलीकॉम ग्राहकों की निजी जानकारियां मौजूद हैं।

लाइव इंडिया के अंडरकवर रिपोर्टरों से इस धंधे में शामिल 12 कारोबारियों ने बैंकों और मोबाइल कंपनियों के ग्राहकों की गोपनीय जानिकारियां बेचने की डील की। कैमरे में कैद इन कारोबारियों ने दावा किया कि इनके पास 1 से 20 करोड़ ग्राहकों के बैंक और मोबाइल से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां मौजूद हैं।
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न्यूज चैनल के मुताबिक उसने इन कारोबारियों को पैसे चुकाकर बैंक ग्राहकों के एकाउंट नंबर, नाम, पते, जन्म तिथि, खाते से जुड़ा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, उनके डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारियां खरीदी हैं। इसके बाद इन सूचनाओं की पुष्टि के लिए संबंधित ग्राहकों से बात की गई तो मामला सही निकला। कारोबारियों ने दावा किया कि इस तरह के डेटा बैंक के कुछ कर्मचारी मोटी रकम लेकर मुहैया कराते हैं।

न्यूज चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन में दलालों से मोबाइल कंपनियों से जुड़ी बैंक ग्राहकों की जानकारियां खरीदीं। उनमें मोबाइल नंबर से जुड़ी जानकारियां मसलन वो किस पते पर रजिस्टर्ड हैं, वो किस नाम पर रजिस्टर्ड हैं, ग्राहक का रजिस्टर्ड ईमेल आईडी क्या है, ग्राहक का दूसरा नंबर क्या है, उसका स्थायी पता क्या है, उसकी जन्म तिथि क्या है, जैसी कई सूचनाएं मौजूद थीं। लाइव इंडिया का दावा है कि दलालों ने लाखों ग्राहकों के बैंक लोन, पर्सनल लोन, कार लोन और होम लोन से जुड़ी जानकारियां भी मुहैया कराईं। इन लोगों ने ग्राहकों की आमदनी और उनके व्यवसाय से जुड़ी कई जानकारियां भी बेचने का दावा किया। लाइव इंडिया ने दलालों से 25 राज्यों के ग्राहकों की जानकारियां खरीदीं। इन जानकारियों की पुष्टि के लिए संबंधित ग्राहकों से बात भी की गई।

न्यूज चैनल का कहना है कि यह स्टिंग आपरेशन जनहित में किया गया है। आज हजारों करोड़ रुपए साइबर क्राइम के जरिए लोगों के खातों से गायब हो रहे हैं। तकनीकी के साथ सूचनाओं का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसी सूरत में इस तरह का सच चौंकाने वाला है। इस स्टिंग ऑपरेशन में ये बात भी सामने आई कि देश भर में ऐसे सैकड़ों किरदार रोज आम आदमी की निजी जानकारियों का सौदा कर रहे हैं। कानून और पुलिस का इन्हें कोई डर नहीं है। इंटरनेट के जरिए भी ये कारोबार अपनी जड़ें फैला रहा है। ये धंधा धीरे-धीरे संगठित उद्योग की शक्ल ले रहा है।
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