अब से पचास-साठ पहले योग को भारत की सीमा से बाहर ले जाकर ख्याति दिलाने वाले लोगों में सबसे बड़ा नाम बेल्लूर कृष्णमाचार सुंदरराजा अयंगार का है।
योग सिखाने का उनका ख़ास तरीक़ा उनके नाम से ही जाना जाने लगा, अयंगार योग का अभ्यास करने वाले लाखों लोग दुनिया भर में फैले हैं।
अब से पचास-साठ पहले योग को भारत की सीमा से बाहर ले जाकर ख्याति दिलाने वाले लोगों में सबसे बड़ा नाम बेल्लूर कृष्णमाचार सुंदरराजा अयंगार का है।
योग सिखाने का उनका ख़ास तरीक़ा उनके नाम से ही जाना जाने लगा, अयंगार योग का अभ्यास करने वाले लाखों लोग दुनिया भर में फैले हैं।
योग पर दर्जन भर से अधिक किताबें लिखने वाले अंयगार की ख्याति कुछ इस तरह फैली कि ऑक्सफर्ड डिक्शनरी में अयंगार संज्ञा का अर्थ 'अष्टांग योग की एक शाखा' की तरह दिया गया है।
जाने कितने लोगों को सांस लेने और छोड़ने का सही तरीक़ा सिखाने वाले अंयगार ने तीन सप्ताह पहले शिकायत की कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया कि उनका दिल और गुर्दा ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
एक स्कूल टीचर के बेटे बीकेएस को बचपन में टीबी ने दबोच लिया था जिससे उबरने के बाद उनके पिता ने उन्हें योग सीखने के लिए पुणे भेज दिया, इसके बाद से योग से उनका रिश्ता कभी नहीं टूटा।
पुणे को लोग भले ही रजनीश के आश्रम की वजह से जानते हों लेकिन इसी शहर में उनका आश्रम है, 1975 में अपनी दिवंगत पत्नी की स्मृति में 'रमामणी अयंगार संस्था' शुरू की जहां देश-विदेश से लोग आते हैं।
उनका इलाज करने वाली डॉक्टर दीप्ति मेंडे ने पीटीआई को बताया कि वे अस्पताल में भर्ती होने के लिए तैयार नहीं थे, शायद उन्हें विश्वास था कि 96 साल पुराना उनका शरीर योगाभ्यास की वजह से इतना चुस्त है कि अपने-आप ठीक हो जाएगा।
बताया जाता है कि बेल्जियम की रानी को भी उन्होंने 80 वर्ष की आयु में शीर्षासन करवाया था।
अयंगार के निधन की ख़बर आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विट किया है, "आने वाली पीढ़ियाँ बीकेएस अयंगार को महान गुरू और शिक्षाविद् के रूप में याद रखेंगी जो पूरी दुनिया के बहुत सारे लोगों को योग से परिचित कराया। "
टाइम मैगज़ीन ने 2004 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों की सूची में उनका नाम शामिल किया था और इसी वर्ष उन्हें पद्मविभूषण सम्मान दिया गया था।
अंयगार ने जिन लोगों को योग सिखाया, उनमें जिद्दू कृष्णमूर्ति, जयप्रकाश नारायण, येहुदी मेनुहिन जैसे नाम शुमार हैं।
उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
बीकेएस आयंगर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखे अपने संदेश में कहा है कि लोग बीकेएस आयंगर को एक शिक्षक, छात्र, निष्ठावान के रूप में याद करेगी, जिसने दुनिया में बहुत से लोगों का क्लिक करें योग से परिचय कराया।