एशिया की दो सबसे ताकतवर हस्तियां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री दोनों ही आस्ट्रेलियाई दौरे पर हैं और दोस्ती के जरिए आस्ट्रेलिया के साथ तमाम समझौतों और करारों का मंसूबा पाले हैं।
जहां एक ओर नरेंद्र मोदी को लेकर ऑस्ट्रेलिया में समारोहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों का दौर चल रहा है वहीं शी जिनपिंग अपनी यात्रा में बिना शोरगुल के सबसे अहम व्यापार समझौते करने में व्यस्त हैं।
अगर आस्ट्रेलिया में चीनियों और हिंदुस्तानियों की संख्या की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया में चीनी मूल के लोगों की संख्या भारतीय मूल के लोगों से बहुत अधिक है। ऑस्ट्रेलिया ब्यूरो ऑफ स्टेटिक्स के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की कुल दो करोड़ 35 लाख लोगों की आबादी में चीनी मूल के लोगों की संख्या 1.8 प्रतिशत, जबकि भारतीय मूल के लोगों की संख्या 1.6 प्रतिशत है।
सोमवार को नरेंद्र मोदी की सिडनी में एक सार्वजनिक सभा आयोजित की जा रही है। सभा स्थल तक लोगों को पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गई हैं। मोदी ने रविवार को जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद ब्रिस्बेन में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। मोदी की ऐसी ही सभाएं पर्थ और मेलबर्न में आयोजित होने वाली हैं। इन आयोजनों को लेकर भारतीय मीडिया में विशेष कवरेज प्रकाशित प्रसारित हो रहे हैं।
जिनपिंग और मोदी को क्या मिला
शी जिनपिंग
उधर, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को राजधानी कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित किया और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में उनके संबोधन को प्रमुखता से जगह मिली।
चीन निवेश के लिए ऑस्ट्रेलिया के बाजार को आजमाना चाह रहा है और जिनपिंग की इस यात्रा में उसे कुछ हदतक यह सफलता हासिल भी हुई। चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए सबसे अहम मुक्त व्यापार समझौते के तहत ऑस्ट्रेलियाई किसानों, वाइन उत्पादकों और डेयरी उत्पादों के उत्पादकों को चीन के बाजार तक पहुंच बनाना आसान हो जाएगा।
अगले चार से 11 वर्ष में इन क्षेत्रों में टैक्स पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। ऑस्ट्रेलियाई वाइन उत्पादक 30 प्रतिशत तक टैक्स देने के बावजूद हर वर्ष 20 करोड़ डॉलर की वाइन चीन को निर्यात करते हैं। टैक्स छूट के बाद इसमें भारी इजाफा होने की संभावना है। इसके बदले चीन को ऑस्ट्रेलिया में निवेश रुकावटों से निजात मिलेगी। ''इस समझौते से चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार देश हो जाएगा।''
मोदी
मोदी के इस दौरे पर उम्मीद थी कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम आपूर्ति को लेकर अहम समझौता होगा, लेकिन यह फिलहाल टल गया है। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के अनुसार, अब इस पर 2015 के मध्य तक कोई समझौता होने की उम्मीद है।
हालांकि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबॉट के साथ मोदी की 'आतंकवाद', साइबर सुरक्षा आदि पर बातचीत हुई है। लेकिन यदि कुछ आर्थिक समझौतों की बात करें तो अभी तक मोदी और उनकी टीम को ऑस्ट्रेलिया से कोई अहम प्रगति हाथ नहीं लगी है।