एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को ऐसे ही मराठा क्षत्रप नहीं कहा जाता। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र में उनके सिवाय कोई और सियासत का बाजीगर नहीं बन सकता।
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन टूटने से लेकर महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण में एनसीपी की भूमिका को राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो यह बात साफ हो जाती है कि शरद पवार ही महाराष्ट्र के किंगमेकर हैं।
19 साल पहले 1995 में जब पहली बार भाजपा-शिवसेना की सरकार बनी थी, तब भी पर्दे के पीछे शरद पवार की भूमिका थी। तब शिवसेना के 73 और भाजपा के 65 यानी कि कुल 138 विधायक।