गुजरात के चुनावी नतीजे आज सामने आएंगे। इन्हीं नतीजों के साथ आज तय होगा नरेंद्र मोदी का राजनीतिक भविष्य। मोदी अगर 117 या इससे अधिक सीटे लेकर आते हैं तो बीजेपी में उन्हें कोई नहीं रोक पाएगा। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में वे बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे, लेकिन अगर सीटें घटकर 100 या इसके आसपास सिमट गईं तो फिर मोदी के लिए राष्ट्रीय राजनीति का सपना अधूरा भी हो सकता है।
मोदी आज की तारीख में बीजेपी के सबसे बड़े नेता के रूप में उभर कर सामने आ रहे है। पार्टी में जो जगह आडवाणी और वाजपेयी के कारण खाली दिख रही है उसे भरने में नरेंद्र मोदी पहली कतार में है। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या देश के अंदर अगली राजनीतिक लड़ाई मोदी बनाम राहुल की नहीं बल्कि 'सेकुलरिज्म' बनाम 'हिंदुत्व' की वैचारिक लड़ाई होगी।
दरअसल, गुजरात चुनाव नरेंद्र मोदी की वजह से ऐतिहासिक हो गया है। मोदी की जगह कोई और होता तो ये सवाल उतना महत्वपूर्ण नहीं होता, लेकिन मोदी के कारण गुजरात के चुनावी नतीजे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय असर भी डालेंगे। क्योंकि इस चुनावी नतीजे को राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पर मुहर के रूप में देखा जा रहा है।
देश और दुनिया में अपनी धमक बरकरार रखने वाले नरेंद्र मोदी के पीछे उनकी कड़ी मेहनत भी है। उन्होंने अपने विरोधियों के समक्ष खुद को कई बार साबित किया है। 2002 की बात करे तो माना जा सकता है कि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के सहारे मोदी जीत गए, लेकिन 2007 के चुनाव भी मोदी ने अनेक विरोधों-अंतर्विरोधों के बावजूद जीत कर दिखाए थे।
वाइब्रेंट गुजरात निवेशक सम्मेलन हो या फिर टाटा की नैनो का गुजरात में जाना या फिर ब्रिटिश सरकार का मोदी के नेतृत्व पर मुहर। मोदी हर कसौटी से सफलतापूर्वक पार उतरते रहे हैं।