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क्या जितेंद्र सिंह होंगे जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री?

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जम्मू-कश्मीर में अपने नेतृत्व में सरकार बनाने की कवायद में जुटी भाजपा ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाने का संकेत दिया है।
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बृहस्पतिवार को जम्मू में हुई पार्टी विधायकों की बैठक में विधायक दल का नेता चुनने और राज्य में सरकार बनाने के बारे में फैसला लेने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दे दिया गया।

इसके बाद शाह के करीबी सूत्रों ने बताया कि जितेंद्र सिंह राज्य में पार्टी का नेतृत्व करेंगे। जितेंद्र सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नजदीकी और भरोसेमंद माना जाता है। उधमपुर सीट से सांसद सिंह की बेदाग छवि भी सीएम पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत करती है।
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नेकां और भाजपा के बीच चल रही बातचीत में जितेंद्र सिंह के भाई और नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा अहम सूत्रधार की भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार बनाने का फॉर्मूला लगभग तैयार

भाजपा को राज्य विधानसभा चुनाव में 25 सीटें मिली हैं और उसने सज्जाद लोन की पार्टी के दो और चार निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त होने का दावा किया है।

पार्टी की रणनीति राज्य में जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन सरकार बनाने की है। पार्टी सूत्रों ने गठबंधन सरकार के लिए फॉर्मूले को अंतिम रूप दिए जाने का भी संकेत दे दिया है।

सूत्रों के मुताबिक बृहस्पतिवार को जम्मू के दौरे पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और पार्टी के वरिष्ठ नेता राम माधव की नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला से मुलाकात भी हुई है। लेकिन, पार्टी ने इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है।

गठबंधन सरकार के फॉर्मूले के अनुसार राज्य में छह साल तक भाजपा ने नेतृत्व में सरकार चलेगी। बारी-बारी से मुख्यमंत्री बदलने का कोई प्रावधान नहीं होगा। राज्य मंत्रिमंडल में नेकां के चार मंत्री होंगे। नेकां को केंद्र में भी दो मंत्री पद (एक कैबिनेट और एक राज्य) दिए जाएंगे।

यूं सुलझेगी 44 प्लस की गुत्थी
भाजपा ने राज्य में सरकार बनाने के लिए 44 प्लस की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। पार्टी ने अपने 25 विधायकों के अलावा सज्जाद लोन की पार्टी के दो और चार निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा किया है। इसके अलावा 15 विधायकों वाली नेकां से साथ गठबंधन के बाद यह आंकड़ा 46 का हो जाएगा।
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‘तू नहीं तो और सही’ के फार्मूले पर भाजपा

जम्मू-कश्मीर में पहली बार खुद की अगुवाई में सरकार बना कर इतिहास रचने की कोशिश में जुटी भाजपा ‘तू नहीं तो और सही’ का फार्मूला अपना रही है।

वह पीडीपी को नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) तो एनसी को पीडीपी का भय दिखाने की रणनीति पर चल रही है। इसी कारण एनसी से सही दिशा में बातचीत बढ़ने के बावजूद भाजपा ने पीडीपी का अध्याय बंद नहीं किया है।

भाजपा ने अगर एनसी के साथ सरकार बनाई तो समर्थन के एवज में उसे उपमुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी जगह देगी।

अगर एनसी के साथ खिचड़ी नहीं पकी तो पार्टी पीडीपी के समक्ष दोनों दलों की 3-3 साल के फार्मूले वाली सरकार का प्रस्ताव रखेगी। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि फिलहाल एनसी का रुख सकारात्मक है।

अगर सब कुछ ठीक रहा तो पार्टी की अगुवाई वाली सरकार में अलगाववादी नेता सज्जाद लोन को अहम भूमिका मिलेगी।

पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि एनसी और पीडीपी की एक-दूसरे को सत्ता में आने से रोकने की चल रही जोर आजमाइश भाजपा के हित में है।
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