महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस बार गठबंधन नहीं चाहते।
पार्टी नेताओं का मानना है कि एनसीपी को लग रहा है कि वह कांग्रेस के साथ विधानसभा चुनाव लड़ती है तो इसका उसे खामियाजा उठाना पड़ सकता है।
इसलिए अकेले लड़ने से भाजपा के साथ चुनाव बाद गठबंधन की संभावना बनी रहने की संभावना है। एनसीपी ने कांग्रेस से 150 के लगभग सीटें मांगी हैं।
सीटों को लेकर विवाद
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस मांग को थोड़े बहुत बदलाव के साथ मान सकती है, क्योंकि पार्टी हाईकमान को आंतरिक रिपोर्ट मिल रही है कि अकेले चुनाव लड़ने से पार्टी की हालत बेहद पतली हो सकती है, जबकि एनसीपी के साथ लड़ने से उसकी लाज बच सकती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि एनसीपी इस बार गठबंधन तोड़ने को लेकर ज्यादा गंभीर है।
दूसरी तरफ पार्टी के कई नेता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के काम के अंदाज को प्रदेश में हार की बढ़ती संभावनाओं के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं।
एनसीपी को बीजेपी से गठबंधन की संभावना
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चव्हाण की ढिलाई का आलम यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिसंबर 2012 में निर्भया कांड के ठीक बाद चव्हाण को कई सालों से खाली पड़े महाराष्ट्र महिला आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति करने के लिए कहा था, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने नहीं किया।
इस पद पर चव्हाण ने नियुक्ति महाराष्ट्र हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद 31 दिसंबर, 2013 में की।
ऐसे ही प्रदेश में कांग्रेस कोटे के 50 से ज्यादा सरकारी बोर्डों के अध्यक्षों के पद खाली पड़े हैं। मगर मुख्यमंत्री ने नियुक्ति नहीं की है। जबकि एनसीपी ने अपने कोटे के सभी बोर्डों में नियुक्तियां कर दी है।