दिल्ली के पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने माना है कि पांच साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में पुलिसकर्मियों से लापरवाही हुई है। हालांकि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार किया है।
राजधानी में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कमिश्नर ने कहा कि जिन लोगों ने 'मुनिया' के परिजनों को पैसा देकर मामला रफा-दफा करने को कहा, उन लोगों की पहचान नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि गांधीनगर के सभी पुलिसकर्मियों को अस्पताल में परिजनों के सामने पहचान के लिए ले जाया जाएगा। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कमिश्नर ने कहा कि रेप के अधिकतर मामलों में पिता, भाई, जीजा, देवर ही आरोपी होते हैं। क्या ये संभव है कि पुलिस ऐसे बलात्कार रोक पाए। 97 फीसदी रेप केस जान पहचान के लोग ही करते हैं। क्या पड़ोसी के द्वारा बच्ची से रेप को रोकना संभव है।
इस्तीफे के सवाल पर भड़के
अपने इस्तीफे पर उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''यदि आपकी गलती के लिए संपादक इस्तीफा नहीं देता तो फिर मैं क्यों इस्तीफा दूं? यदि मेरे इस्तीफे से बलात्कार जैसी घटनाएं रूक जाएंगी तो मैं हजार बार इस्तीफा देने को तैयार हूं।''
कुमार ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने तुरंत कदम उठाए हैं। प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने वाले एसीपी अहलावत को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं गांधीनगर थाने के एसएचओ और जांच अधिकारी को भी निलंबित कर दिया गया है।