देश्ा भर में लोगों के घरों में रखा लाखों-करोड़ो रुपए का सोना बाहर निकालने के लिए केंद्र सरकार ने गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत सरकार की योजना है कि लोग अपने घरों में रखा सोना बैंकों में जमा करें। उसके बदले में बैंक उस सोने पर लोगों को ब्याज देगा।
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अभी इस योजना का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इस योजना के मुताबिक कोई भी व्यक्ति कम से कम 30 ग्राम सोना बैंक में जमा करके इस योजना का लाभ उठा सकेगा। इस योजना की खासियत है कि लोगों को जो भी ब्याज प्राप्त होगा। उस पर कोई टैक्स छूट मिलेगी।
पर इसके बावजूद इस स्कीम को लेकर अब सर्राफा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्कीम में सोना जमा करने पर लोगों को जिस दर से लाभ का भुगतान किया जाना है उसकी ब्याज दर अच्छी होनी चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्तिगत स्तर पर लोग और संस्थान एक अपना सोना बैंकों में जमा करेंगे।
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जब होगा फायदा तभी जमा करेंगे लोग सोना
ऐसा नहीं है कि पहली बार कोई गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम बाजार में आ रही है। पूर्व में भी कई स्कीम लांच की गई थी। पर उन स्कीमों में निवेशक को बहुत कम ब्याज दिया जा रहा था।
पूर्व में निवेशक को सिर्फ 0.75 से 1 फीसदी के बीच ब्याज दिया जा रहा था। इंडस्ट्री के लोगों को मानना है कि लोगों को आर्कषित करने के लिए 4 से 6 फीसदी ब्याज को ऑफर किया जाना चाहिए।
इस पर लोग अपनी ज्वैलरी और सोने के सिक्के पिघलवाने के लिए तैयार होंगे। गौरतलब है कि इस स्कीम में लोग चाहे ज्वैलरी या फिर सामान्य सोने को बैंक में जमा करें। बैंक उस सोने को पिघलाकर सोने के बिस्कुट के रूप में तब्दील करेगा। बाद में सोना वापस लेने पर भी लोगों को ज्वैलरी और सामान्य रूप में सोना नहीं मिलेगा। बल्कि सोने के बिस्कुट ही दिए जाएंगे।
एक प्राइवेट बैंक के अधिकारी के मुताबिक बैंक 4-6 फीसदी के ब्याज को ऑफर कर सकते हैं। पर वो यह ब्याज तभी ऑफर करेंगे जब वह बैंकों में जमा सोना ज्वैलर्स को उधार दे सकें। भारत एक बड़ा सर्राफा बाजार है।
पर उन्होंने कहा कि जमा किए गए सोने पर कितना ब्याज दिया जाए, यह सुनिश्चित भारतीय रिजर्व बैंक की इस बाबत तैयार की गई गाइडलाइंस के आधार पर होगा। साथ ही आरबीआई यह भी बताएगा कि बैंकों में जमा सोने का कितना हिस्सा उधारी पर दिया जा सकता है।
स्पष्ट नहीं है पूरी स्कीम
मन्नापुरम फाइनेंस के गैर-कार्यकारी निदेशक उन्नीकृष्णनन का मानना है कि बैंक में जमा सोने पर ब्याज दर, बचत खाते पर मिलने वाली ब्याज दर से अधिक होनी चाहिए। अभी देश भर में अधिकतर बैंक साधारण बचत खाते पर 4 फीसदी ब्याज देते हैं। अगर इससे ज्यादा ब्याज बैंकों में जमा किए गए सोने पर दिया जाएगा तो लोग इस तरफ आर्कषित होंगे।
इससे पहले वर्ष 1999 में भी इए स्कीम घोषित की गई थी जिसके तहत 200 ग्राम तक का सोना जमा किया जा सकता था। नई स्कीम के ड्रॉफ्ट के मुताबिक 30 ग्राम सोने को बैंक में जमा करने की सीमा तय करने से कम आय वर्ग से जुड़े लोग भी इस स्कीम में निवेश कर सकेंगे। साथ ही अधिक ब्याज का फायदा उठा सकेंगे।
उनके मुताबिक अभी इस स्कीम को लेकर पूरी तौर पर स्पष्टतता नहीं है। जब इस स्कीम को लेकर सारे संशय दूर हो जाएंगे तो लोग खुद ही इसमें निवेश करेंगे।
इस स्कीम को लेकर लगातार ऐसे सवाल भी किए जा रहे हैं कि आखिर क्या बैंक वाले इस स्कीम को लेकर तैयार होंगे? इस स्कीम में ब्याज से टैक्स छूट की बात की गई है।
पर अभी देश भर में बैंक एक सा उससे भी कम ब्याज दर पर विदेशी बाजार से सोना लीज पर लेते हैं। ऐसे में जब विदेशों से उन्हें इतना सस्ता सोना मिल जाता है तो वह ज्यादा ब्याज देकर सोना क्यों बैंक में जमा करेंगे? हां, एक संभावना हो सकती है कि लोगों को अधिक बैंक अधिक ब्याज दर का ऑफर देकर आर्कषित करने की कोशिश करें। पर अभी भी देखना होगा कि आखिर बैंक की कौन की दर से लोगों के ब्याज देते हैं।
बैंक निवेशकों को इसका कितना फायदा देते हैं?
चिराग मेहता-फंड मैनेजर, कवांटम एएमसी के मुताबिक सरकार ने गोल्ड मॉनिटाइजेशन की स्कीम को बढ़ावा देने के लिए सोने को सीआरआर और एसएलआर का भाग बना सकती है पर यह देखना होगा कि बैंक निवेशकों को इसका कितना फायदा देते हैं? ग्राहकों को इस स्कीम में 5-6 फीसदी ब्याज दिया जाना चाहिए।
इस स्कीम में या भी साफ नहीं किया गया है कि कौन सा सोना लोग बैंकों में जमा कर सकेंगे। भारत में अधिकतर लोग बिना पर्ची के लिए अभी भी सोना खरीदते हैं। ऐसे में टैक्स पेड इनकम के तहत खरीदा गया सोना बैंकों में जमा होगा या फिर बिना रसीद के खरीदा गया सोना भी बैंक में जमा हो सकेगा।
भारत में अधिकतर लोग अपने घर के आस-पास की दुकान से सोना खरीदते हैं, क्योंकि घर के पास के सोनार पर उन्हें ज्यादा भरोसा होता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत के जिनते घरों में भी सोना होगा। उसमें कुछ न कुछ भाग बिना रसीद के खरीदा गया सोना भी होगा।
मैकलई फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ जामाल मैकलई का मानना है कि अगर सरकार गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम के तहत केवल बैंकों में वही सोना जमा करेगी जिन पर टैक्स जमा किया गया है तो यह कहना बहुत मुश्किल होगा कि सरकार इस स्कीम में कितनी कारगर साबित होगी। क्योंकि भारत में अधिकतर लोग बिना पर्ची के आज भी सोना खरीद रहे हैं। ऐसे में सोने का बड़ा हिस्सा बैंकों में जमा नहीं हो पाएगा।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वहीं गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम को लाने से पहले सरकार को ऐसी पॉलिसी बनानी चाहिए जिसमें लोगों से यह न पूछा जाए कि यह सोना कहा से खरीदा है। अगर बैंक ऐसी स्कीम लाएंगे तो बैंकों में सोना जमा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। साथ ही ऐसी स्कीम आने से सोने की मांग भी बढ़ सकती है।
वहीं यह भी प्रश्न उठ रहा है कि कैसे क्या महिलाएं जिन सोने की ज्वैलरी को पहनती है वो उन आभूषणों को क्या बैंक में जमा करेंगी? क्योंकि बैंक में जमा किया जाने वाला सोना किसी भी अवस्था में हो। पर पैसे उसे पिघलाया जाएगा और फिर उसके बिस्कुट बनाकर बैंक में जमा किया जाएगा। ऐसे में औरतें अपने उन आभूषणों को बिल्कुल भी जमा नहीं करेंगी जो वह पहनती हैं। ऐसे में बैंक में सोना जमा करवाने के लिए सरकार को कोई ऐसी स्कीम लानी होगी जो निवेशकों को ज्यादा आकर्षित करें।