संसद पर 2001 में हुए आतंकी हमले में संलिप्तता के चलते जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी अफजल गुरू को शनिवार सुबह फांसी दे दी गई। सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक दलों ने सधी प्रतिक्रिया दी है। तो आइए जानते हैं किस पार्टी का इस मुद्दे पर क्या रूख रहा।
विपक्षी पार्टियां फांसी में देरी के मुद्दे का राजनीतिकरण न करें। सरकार ने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं से गुजरकर यह कदम उठाया है। कांग्रेस आतंकियों के हाथों इंदिरा और राजीव गांधी जैसे नेताओं को गंवा चुकी है। मगर क्या कंधार कांड के वक्त भाजपा ने आतंकियों से समझौता नहीं किया था। -- दिग्विजय सिंह, कांग्रेस महासचिव
कानून ने अपना काम किया। इससे दुनिया भर के आतंकी संगठनों को संदेश जाएगा कि भारत आतंकी गतिविधियों को और बर्दाश्त नहीं करेगा। -- राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता
केंद्र जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है। इससे दुनिया में सख्त संदेश जाएगा। -- श्रीप्रकाश जायसवाल, कोयला मंत्री
आखिरकार न्याय हो गया। -- संदीप दीक्षित, कांग्रेस प्रवक्ता
2005 में सुप्रीम कोर्ट से मौत की सजा पर मुहर लगने के बाद यह फैसला बहुत पहले ही ले लेना चाहिए था। लोगों की भावनाओं को जानते हुए भी ऐसा क्यों नहीं किया गया। जो लोग अफजल के मानवाधिकार की बात करते हैं, क्या वे बताएंगे कि इस घटना में शहीद हुए लोगों के परिजनों के भी कुछ मानवाधिकार हैं या नहीं। -- रवि शंकर प्रसाद, भाजपा नेता
देरी के बावजूद हमारा मानना है कि यह एक सही कदम है। -- राजीव प्रताप रूडी, भाजपा प्रवक्ता
यह एक देर से लेकिन राष्ट्रीय हित में लिया गया निर्णय है। इससे देश के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही दुनिया में भी कड़ा संदेश जाएगा। -- मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा उपाध्यक्ष
संसद पर हमला एक तरह से भारत पर हमला था। इस घटना के बाद पूरे देश ने एक सुर में इसकी निंदा की। देर भले ही हुई, लेकिन आखिरकार कानून ने अपना काम किया। -- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता विपक्ष
भविष्य में कोई भी व्यक्ति संसद हमले जैसी घटना को अंजाम देने का साहस नहीं करेगा। उसे आरोप सिद्ध होने के तुरंत बाद फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए था, लेकिन कभी नहीं से देर भली। -- गोपीनाथ मुंडे, भाजपा नेता
यह काफी अच्छा कदम है, लेकिन यह फैसला बहुत देर से लिया गया। सरकार को इस तरह के कड़े कदम समय रहते उठाने चाहिए ताकि दुनिया में आतंकवाद को लेकर भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का संदेश दिया जा सके। -- ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान
अफजल गुरू ने संसद पर हमले के जरिए भारत की संप्रभुता को चुनौती दी थी। वह इसी सजा का हकदार था। -- राम माधव, संघ नेता
हम अफजल को फांसी दिए जाने का स्वागत करते हैं। हालांकि सरकार को यह फैसला बहुत पहले ही कर लेना चाहिए था। -- मनमोहन वैद्य, संघ नेता
पीडीपी अफजल गुरू को फांसी दिए जाने से निराश है। हमने अपील की थी कि उसकी दया याचिका पर किसी भी तरह का फैसला लिए जाने से पूर्व मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उमर अब्दुल्ला अफजल की फांसी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। -- नईम अख्तर, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रवक्ता
सरकार ने यह फैसला लेने में लंबा वक्त लगाया, लेकिन आखिरकार लोगों की भावनाओं का पूरा ख्याल रखा गया। हालांकि गुरू जैसे आतंकी को लोगों के पैसों पर इतने समय तक जिंदा रखना कहीं अधिक बड़ा अपराध है। बाल ठाकरे हमेशा अफजल को फांसी देने की मांग किया करते थे। -- संजय राउत, शिवसेना प्रवक्ता
हर कर कोई कानून से बंधा है। मुझे खुशी है कि लंबी जांच के बाद आखिरकार न्याय हो गया। -- अमिताभ बच्चन, अभिनेता
कानून ने अपना काम किया। करीब 12 साल से चला आ रहा मामला आखिरकार अब अपने मुकाम तक पहुंच गया। -- सीताराम येचुरी, माकपा नेता
दुस्साहसिक कृत्य को अंजाम देने वाले व्यक्ति को सजा देकर सरकार को यह नहीं सोचना चाहिए कि उसने आम लोगों के पक्ष में कोई काम किया है। -- रामदेव, योगगुरु
अफजल को बहुत पहले ही फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए था। -- अशोक सिंघल, विहिप नेता
आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता। अफजल को काफी पहले ही फांसी दे दी जानी चाहिए थी। -- आरपी कुशवाहा, सपा के राष्ट्रीय महासचिव
भारत ने अच्छा संदेश दिया है। आतंकी जिंदगी की परवाह नहीं करते, पर उन्हें जिंदगी बख्शने का भी कोई मतलब नहीं। हमें नापाक इरादा रखने वाले पड़ोसियों को बताना होगा कि जो हमारे अस्तित्व पर चोट करेगा उसे दंड मिलेगा।---शैलेंद्र राज बहुगुणा, रिटायर्ड मेजर जरनल
आतंक का कोई धर्म नहीं होता। वह न तो हिंदू होता है और न ही मुसलमान होता है। वह सिर्फ आतंक होता है। इसलिए आतंकी को दंड दिया ही जाना चाहिए। दरअसल जिहाद एक धंधा बन गया है।--- निदा फाजली, शायर
अफजल को फांसी देने का जो काम आज हुआ है, वह बहुत पहले हो जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देर करने का कोई तुक नहीं था। इससे हम कहीं न कहीं कमजोर साबित होते रहे हैं।--एमजे अकबर, प्रख्यात पत्रकार
अफजल के मामले में कुछ देर हुई, लेकिन उसे फांसी दिए जाने से देश में खुशी का माहौल है। वैसे मेरा मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट किसी को फांसी की सजा सुनाता है तो दंड देने में देरी नहीं करनी चाहिए। --- अग्निशेखर, साहित्यकार और पनुन कश्मीर के संयोजक
आतंकियों को सजा मिलनी चाहिए। पर यह भी ध्यान रखें कि देश में सांप्रदायिक सौहार्द का माहौल न बिगड़े। जहां तक आतंकियों का सवाल है तो उनके लिए कहीं रहम नहीं होनी चाहिए। देश में धर्मनिरपेक्ष माहौल सबसे अहम है।
--- अबू आजमी, सपा नेता
फांसी की सजा होने पर उसकी समयावधि तय करने के कुछ नियम होने चाहिए। कानून में बदलाव कर प्रावधान किया जा सकता है कि अगर राष्ट्रपति तीन माह में फैसला नहीं लेते तो दया याचिका निरस्त मान ली जाए।--- उज्जवल निकम, कसाब मामले में सरकारी वकील
कश्मीर में बिगड़ते हालात को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था। कसाब या अफजल को फांसी देने भर से देश की छवि नहीं बदलेगी। इसके लिए अपराधियों के मन में खौफ बैठना चाहिए कि वे बच नहीं सकेंगे।--- अजय साहनी, सामरिक मामलों के समीक्षक
एक ऐसा शख्स जिसने हमारे लोकतंत्र के मंदिर पर हमला किया हो, उसे फांसी देनी ही चाहिए थी। हमें ऐसे मामलों से बहुत प्रोफेशनल ढंग से निपटना चाहिए। आखिर डकैतों और आतंकियों को एक ही तरह से नहीं देख सकते।--- अशोक पंडित, कश्मीर पर बनी फिल्म शीन के निर्माता
अफजल को फांसी देने का फैसला बहुत अच्छा है, लेकिन हमें अपने सिस्टम को सुधारना होगा। मैं ये तो नहीं कहता कि हम कहीं से कमजोर हैं, लेकिन हम थोड़े सुस्त जरूर हैं। इसकी वजह से भारत को कई मुश्किलें उठानी पड़ी हैं।--- केपीएस गिल, पूर्व पुलिस महानिदेशक
पूरा देश अफजल गुरू को फांसी दिए जाने से सहमत है, लेकिन आतंकी मानने वाले नहीं। वे आसानी से नहीं झुकेंगे। इस घटना से बौखलाए आतंकवादी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। हमें बहुत चौकस रहना होगा।--- डॉ. भरत वर्मा, विश्लेषक