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सोशल साइटों पर छाई अजफल गुरू की फांसी

Sat, 09 Feb 2013 07:18 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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अफजल गुरू की फांसी को लेकर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर प्रतिक्रियाओं का बाजार गरम है। ट्विटर और फेसबुक पर अफजल को फांसी का मुद्दा छाया है।
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फांसी को लेकर दुनिया भर के भारतीयों ने खुशी जताई है तो कई लोगों ने कहा है कि अफजल को खुद को निर्दोष साबित करने का एक और मौका देना चाहिए था।

कोई सरकार की वाहवाही कर रहा है तो कोई सरकार से सवाल पूछ रहा है कि फांसी देने में इतनी देरी क्यों की। जबकि कोई जानना चाहता है कि अफजल पर भारत सरकार ने कितना खर्च किया।

कई यूपीए सरकार के फैसले को आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़ रहे हैं तो कई राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की तारीफों के पुल बांध रहे हैं।
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एक ओर जाने माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया है कि कसाब को शीतकालीन सत्र से पहले फांसी दी गई और अफजल गुरू को बजट सत्र से पहले। कोई संयोग तो नहीं।
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लेखिका अरुंधती राय साबित कर रही है कि अफजल निर्दोष था।

किरण बेदी ने कहा है कि कानून ने अपना चक्र पूरा किया है। अफजल को फांसी हुई।

वहीं ट्विटर पर अब्दुल मानफ ने कहा है कि एक जिम्मेदार राष्ट्र में आखिर कैसे एक व्यक्ति को सामूहिक अंतरात्मा की आवाज के नाम पर लटकाया जा सकता है। यह डेमोक्रेसी नहीं ‘डेमोक्रेजी’ है।

उमर फारूख ने कहा कि यहां लोकतंत्र नहीं छद्मवाद है।

ट्विटर पर अभिषेक जैन ने कहा कि अफजल की फांसी का विरोध करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को देश से बाहर निकलना चाहिए।

फेसबुक पर नावेद खान ने कहा है कि अफजल जाएगा नरक।

असीम त्रिवेदी ने कहा है कि यह यूपीए सरकार का महंगाई और भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने का एक स्टंट है।
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