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कार्यकर्ताओं को पिटवाकर मांद में घुसे भाजपाई कमांडर

Sun, 06 Jul 2014 01:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
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लाउडस्पीकर को मुद्दा बनाकर कांठ में हिंदू महापंचायत का ऐलान करने वाली भाजपा ने पुलिस गिरफ्त में फंसे कार्यकर्ताओं को तन्हा छोड़ दिया है। हिंदुत्व और पार्टी आह्वान का वास्ता देकर मंडलभर में कार्यकर्ताओं को कांठ का रास्ता दिखाने वाले भाजपा के सूरमा पुलिस एक्शन के बाद मांद में जा छुपे हैं।
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आलम ये है कि शुक्रवार को थाने में भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बेरहम पिटाई हुई, शनिवार को उन्हें जेल भेज दिया गया। लेकिन मंडल की सभी छह लोकसभा सीटों पर काबिज भाजपा का कोई बड़ा नेता इनका हालचाल तक जानने नहीं पहुंचा।

संगठन के नरम रुख और सांसदों ने रवैय्ये से भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त गुस्सा पनप रहा है। पुलिस लाइन से लेकर अस्पताल और कचहरी से लेकर जेल तक गिरफ्तार भाजपाई सांसदों और संगठन के बड़े नेताओं को कोसते रहे। इनका दर्द था कि  पुलिस के सख्ती करते ही नेतृत्व और सांसद गायब हो गए। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। पहले उन्हें घरों से बुलाया गया, लेकिन जब गिरफ्तार कर लिए गए तो उनके घरों पर सूचना तक नहीं दी गई।
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कार्यकर्ताओं का गुस्सा पड़ सकता है भारी

मुरादाबाद सांसद सर्वेश सिंह ठाकुरद्वारा में ही थे, वो सुबह से शाम तक कार्यकर्ताओं को मुरादाबाद पहुंचने का आश्वासन देते रहे लेकिन पहुंचे नहीं। संभल सांसद सत्यपाल सैनी भी शहर में मौजूद थे, रामपुर सांसद डा. नैपाल सिंह पुलिस लाइन से चंद कदम दूर जिगर कालोनी आवास पर पूरे दिन डेरा डाले थे। कार्यकर्ताओं को इस बात पर गुस्सा था कि कोई सांसद न तो पुलिस लाइन पहुंचा और न ही अस्पताल या कचहरी। दस दिन से जेल में बंद कार्यकर्ताओं का हाल जानने के लिए भी कोई सांसद, विधायक मंत्री जेल नहीं पहुंचा।

अमरोहा के कार्यकर्ताओं को गुस्सा था कि उनके सांसद कंवर सिंह तंवर जिलाध्यक्ष गिरीश त्यागी और कार्यकर्ताओं को सलाखों में फंसा छोड़कर दिल्ली कूच कर गए। महापंचायत का आह्वान करने वाले क्षेत्रीय अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष रितेश गुप्ता, पूर्व विधायक राजेश चुन्नू ने भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई।

नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान तो पलटे तक नहीं। प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व ने भी कोई कड़ा रुख नहीं दिखाया। कार्यकर्ताओं का ये गुस्सा भाजपा को भारी पड़ सकता है। खासकर तब जबकि ये सभी कार्यकर्ता रेलवे ट्रैक पर बवाल होने के कई घंटा पहले से पुलिस गिरफ्त में थे और उन्हें झूठे मुकदमे में पुलिस ने बुक किया हो।
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