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पीएम मोदी इन हिंदी वालों की कब सुनेंगे आप?

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यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों का अपनी मांगों को लेकर पिछले एक साल से चल रहा आंदोलन अब आमरण अंशन का रूप ले चुका है।
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दिल्ली स्थित मुखर्जी नगर में 50 से अधिक छात्र जिसमें 20 लड़कियां भी शामिल हैं 6 जुलाई से लगातार आमरण अंशन पर बैठे हुए हैं, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई प्रतिनिधि उनसे बात करने तक नहीं पहुंचा है।

इससे पूर्व करीब 15000 छात्र 27 जून को अपनी मांगों को लेकर रेसकोर्स भी गए थे, वहां सारी रात बैठे रहे लेकिन सरकार की तरफ से न तो कोई प्रतिनिधि इनकी बातों को सुनने आया न ही किसी प्रकार का आश्वासन ही उन्हें मिला। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगो को लेकर एकत्र हुए इन छात्रों को अंत में पुलिस ने गिरफ्तार कर वहां से हटा दिया जिनमे कई लड़कियां भी थीं।
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छात्रों की क्या है मांग?

छात्रो की मांग है कि बदलाव के बाद प्रारंभिक परीक्षा में शामिल किए गए सीसैट को हटाया जाए जिसका सीधा लाभ इंजिनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्रों को मिल रहा है।

कई बार प्रदर्शन कर चुके इन छात्रों का कहना है कि अब उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं हैं क्योंकि हमारी बातों को कहीं नहीं सुना जा रहा है।

विदित हो कि इन छात्रों की यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा अगले महीने की 24 तारीख को है और इन्हें इस परीक्षा में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए यह संघर्ष करना पड़ रहा है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान यूपीएससी ने अपने पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किया है जिससे ग्रमीण और मानवीकी पृष्ठभूमि के छात्रों के साथ हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों के चयन में नाटकीय रूप से गिरावट दर्ज की गई है, और अब हाल यह हो गया है कि 2013 के यूपीएससी के रिजल्ट में 1122 लोगों का चयन हुआ है जिसमें हिंदी माध्यम के छात्रों की संख्या केवल 26 है।
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सीसैट को कोर्स से हटाने के कर रहे प्रदर्शन

चयन में इस गिरावट के लिए छात्र यूपीएसी की अंग्रेजी परस्ती को और प्रारंभिक परीक्षा में शामिल किए गए सीसैट को जिम्मेदार मान रहे हैं।

यूपीएससी की तौयारी कर रहे छात्र दुष्यंत का कहना है कि सीसैट के कारण इंजिनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्रों काफी लाभ मिल रहा है जबकि मानविकी एवं हिंदी माध्यम के छात्र इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, इसलिए हम सीसैट को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग कर कहे हैं साथ ही मेंस मे जो अंग्रेजी क्वालिफाइंग का प्रश्न पत्र है उसे भी अन्य भारतीय भाषाओं के स्तर का बनाया जाए।

जबकि एक और छात्र सम्पूर्णानंद कहते हैं कि यूपीएससी के प्रश्न जो मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया जाते हैं उसका हिंदी अनुवाद काफी जटिल और कई जगहों पर गलत भी होता है अर्थात हमारी मांग यह है कि मूल प्रश्न पत्र हिंदी में ही तैयार किए जाऐं।

छात्र प्रारंभिक परीक्षा की तिथि को भी आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं क्योंकि आंदोलन और अंशन के कारण उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
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