15वीं लोकसभा के आखिरी दिन भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं पर काबू रख पाए। सदस्यों की लगातार तारीफ के बीच आडवाणी को कई बार खुद को भावनाओं में बहने से रोकने की कोशिश करते हुए देखा गया।
इसी दौरान जब माकपा के बासुदेव आचार्य ने उन्हें फादर ऑफ द हाउस बताया तो आडवाणी ने आंसुओं को रोकने लिए अपना चेहरा झुका लिया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी उनकी जमकर तारीफ की।
इस दौरान वह आडवाणी को कथित तौर पर पार्टी में साइड लाइन करने की कोशिशों पर भाजपा नेताओं को भरे सदन में खरी खरी सुनाने से नहीं चूके।
विदाई भाषणों में सबसे अधिक तारीफ और सम्मान आडवाणी को मिला। चाहे प्रधानमंत्री हों या अन्य दलों के नेता सभी ने सदन के सबसे वरिष्ठ नेता की जमकर तारीफ की।
माकपा नेता बासुदेव आचार्य ने उनकी तुलना गृहमंत्री रहे इंद्रजीत गुप्त से की और कहा कि आडवाणी भी गुप्त की तरह फादर ऑफ द हाउस हैं। आचार्य की इस टिप्पणी से आडवाणी बेहद भावुक हो गए।
इसके बाद जब मुलायम ने तारीफ शुरू की तो आडवाणी को बार-बार भावुक होते देखा गया। इसी दौरान जब विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उनकी तारीफ शुरू की तो भावनाओं में बहने से बचने के लिए आडवाणी को पहलू बदलते देखा गया।