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अखिलेश मरहम लेकर गए, लेकिन जख्म ज्यादा निकले

Mon, 16 Sep 2013 12:03 PM IST
अमर उजाला मुजफ्फरनगर
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कवाल गांव की बात है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मृतक शाहनवाज के पिता सलीम कुरैशी, चाचा और दो अन्य लोगों से बातचीत कर निकलते हैं।
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तत्काल ही कई लोग सलीम से कहते हैं, लिस्ट 12 लोगों की थी, सिर्फ चार लोगों को ही क्यों मिलवाया गया?

सीएम को सारी बातें बतानी चाहिए थी। सलीम ने कहा, मुझे जितना कहना था, कह दिया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि अब सब कुछ ठीक होगा।

तुरंत ही पलटकर कहते हैं, वादा करना आसान होता है। बात तो तब है जब सीएम उसे तत्काल पूरा करें। मुख्यमंत्री के रिस्पांस से नाखुश कुछ लोग नारेबाजी करने लगते हैं। मुस्लिमों के दो पक्षों में बहस होने लगती है।

गांव: मलिकपुरा
अखिलेश यादव मृतक सचिन के पिता बिशन सिंह और गौरव के पिता रविन्द्र सिंह को ढांढस बंधाते हैं। नरेन्द्र सिंह, धर्मवीर सिंह और हरेन्द्र सिंह उन्हें 27 अगस्त की घटना की जानकारी देते हैं, ज्ञापन भी सौंपते हैं।
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एकतरफा कार्रवाई पर आपत्ति जताते हैं। सीएम मृतकों के घर पहुंचते हैं तो लड़कियां रोने लगती हैं। कहती हैं, हमारा स्कूल जाना बंद हो गया है।

सीएम के जाने पर बिशन सिंह कहते हैं, हमें आश्वासन से संतुष्टि नहीं है। दोषियों पर कार्रवाई चाहते हैं। ऐसी ही प्रतिक्रिया गौरव के पिता रविन्द्र सिंह की है।

वहां बैठे लोग कहते हैं, जख्मों पर मरहम सीएम के आने से नहीं निष्पक्ष कार्रवाई से लगेगा। कवाल और मलिकपुरा वही गांव हैं जहां से मुजफ्फरनगर-शामली के दंगों की बुनियाद पड़ी।

कवाल कांड के बाद प्रशासनिक चूक, गलत नामजदगी, इकतरफा कार्रवाई ने माहौल को इतना गरमाया कि नतीजा दंगों के रूप में सामने है।

27 अगस्त को छेड़छाड़ के विरोध पर मलिकापुरा के सचिन और गौरव ने कवाल गांव में वहीं के शाहनवाज कुरैशी की हत्या कर दी थी। इसके बाद भीड़ ने उन दोनों को मौत के घाट उतार दिया था।

रविवार को मुख्यमंत्री के दौरे की शुरुआत इन्हीं दोनों गांवों से हुई। दोनों जगह वे करीब 15-15 मिनट रुके। मकसद था दोनों ही पक्षों के जख्मों पर मरहम लगाना।

मुख्यमंत्री के आने से पहले उम्मीदों के जो भाव मृतकों के परिजनों और दूसरे लोगों के चेहरे पर थे, सीएम के जाने के बाद वे नदारद थे। इसके उलट दोनों ही जगह लोग मायूस दिखे।

कवाल में तो प्रतिक्रिया काफी तीखी रही। सीएम के जाने पर काले झंडे दिखाए गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।

पूरी होती नहीं दिख रहीं उम्मीदें
कवाल और मलिकपुरा में मुख्यमंत्री से लोगों के कई सवाल थे, पर उनका जवाब नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री से मिलने की तैयारी से आए चितौड़ा के प्रधान मो. सुभानी ने बेबाकी से कहा, हमारे दिल की बात नहीं सुनी गई।

मुख्यमंत्री गांव के आम लोगों से नहीं मिले। जिन लोगों से मिले वे अब तक गांव से बाहर थे। उन्हें हालात का पता ही नहीं है। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए 12 लोगों की सूची तैयार की गई थी लेकिन अफसरों ने केवल चार को ही मिलवाया।

प्रशासन ने तीन युवकों की हत्या के बाद से इकतरफा कार्रवाई की। हालांकि पूर्व प्रधान मोहसिन ने कहा कि हम संतुष्ट हैं। उम्मीद है मुख्यमंत्री निष्पक्ष कारवाई करेंगे।

मुस्लिम मंत्री क्यों नहीं आया?
कवाल के लोगों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के साथ राजेन्द्र चौधरी क्यों आए हैं ? कोई मुस्लिम मंत्री क्यों नहीं हैं? शायद उनका इशारा आजम खां की तरफ था।

उनके पक्ष में कुछ लोगों ने नारे भी लगाए। नारे सपा के खिलाफ भी लगे। मौलाना इरशाद ने सरकार विरोधी नारे लगा रहे लोगों से घरों में आने को कहा तो गांव के ही जहीर आलम से उनकी तीखी बहस हो गई।

वे सपा और मुख्यमंत्री के पक्ष की बातें सुनने को तैयार नहीं थे। लोगों ने कहा, मुख्यमंत्री के आने से मिला क्या है। मुख्यमंत्री से बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन वे पूरी होती नहीं दिख रहीं। आश्वासन सिर्फ लोगों को बहलाने के लिए होते हैं।

क्यों एकपक्षीय कार्रवाई होती रही?
मलिकपुरा में लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने बेबाकी से शिकायती लहजे में बात रखी। कहा कि सचिन और गौरव की हत्या के बाद से लगातार एकपक्षीय कार्रवाई क्यों होती रही।
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पुलिस ने खून सने कपड़ों में छह लोगों को मौके पर ही पकड़ लिया था, लेकिन छोड़ दिया। दूसरे पक्ष के दबाव में तत्काल ही डीएम और एसएसपी का तबादला कर दिया।

शाहनवाज की हत्या में झूठी नामजदगी करा दी गई। 31 अगस्त को पंचायत के दौरान एक कार फूंकी गई को साजिशन सचिन-गौरव की हत्या के गवाहों को नामजद कर दिया गया।

कवाल के एक ही पक्ष के छह लोगों पर एनएसए लगा दी गई। मुख्यमंत्री के जाने पर गांव में मौजूद जिला सहकारी बैंक की अध्यक्ष वंदना वर्मा और मुदित वर्मा ने कहा सीएम के आने का मकसद तब पूरा होगा जब वादे पूरे हों। सुरेन्द्र सिंह ने कहा, कोई आए-जाए हमें कार्रवाई चाहिए।
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