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आईएसआई के निशाने पर वेस्ट यूपी, पढ़िए पूरा खुलासा

Sun, 17 Aug 2014 07:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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वर्षों आईएसआई से जुड़े आसिफ की मेरठ से गिरफ्तारी ने पश्चिमी उतर प्रदेश में फैलते आईएसआई के नेटवर्क की ओर फिर से इशारा किया है। पहले भी कई बार ऐसे लोग पकड़े जा चुके हैं, मगर नई चिंता यह है कि अब आईएसआई और आतंकी संगठन ऐसे लोगों से संपर्क बढ़ा रहे हैं, जो खुद को परेशान और पीड़ित महसूस करते हैं। उन्हें रुपयों का लालच देकर देशद्रोह के लिए तैयार किया जा रहा है।
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दो महीने पहले पूर्व दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किए गए दो संदिग्ध आतंकियों ने भी इसका खुलासा किया था कि मुजफ्फरनगर दंगे के पीड़ित संपर्क में थे। पिछले दिनों पकड़ा गया आतंकी सुभान भी मुजफ्फनगर के लोगों से जुड़ा था। इसके अलावा आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) की गतिविधियां भी मेरठ और मुजफ्फरनगर में बताई जाती हैं। स्लीपर सेल्स भी यहां सक्रिय हैं। आतंकी दिल्ली, आगरा, बनारस और जयपुर के अलावा मेरठ भी घूमकर गए थे।

वहीं, पश्चिम की बेल्ट से पूरी तरह वाकिफ रहे इकबाल काना और अब्दुल करीम टुंडा ने भी यहां आईएसआई की जड़ें जमाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। एनसीआर में नकली करेंसी, मादक पदार्थ, असलहों की खेप खपाने में इन आतंकियों और उनके गुर्गों ने सक्रिय भूमिका निभाई। पाकिस्तान भागने के बाद उसने अपने खास लोगों को इसकी जिम्मेदारी दे दी। वर्तमान में इकबाल आईएसआई का कमांडर बताया जाता है। पुलिस अफसर भी मानते हैं कि यह खेल अभी भी चल रहा है।
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बड़ा खतरा है आसिफ का बना नेटवर्क

आईएसआई एजेंट आसिफ का नेटवर्क पश्चिमी यूपी के लिए बड़ा खतरा है। आठ साल के भीतर उसने बहुत से लोगों से संपर्क साधा। कई शहरों में आना जाना रहा। सेना में भी उसकी गहरी घुसपैठ रही। ऐसे में आसिफ के नेटवर्क को खंगाल पाना पुलिस और एसटीएफ के लिए भी चुनौती से कम न होगा।

हालांकि एसटीएफ के एसएसपी उमेश कुमार सिंह ने बताया कि आसिफ को रिमांड पर लिया जाएगा। उन्हें भी आशंका है कि आसिफ के संपर्क में आए लोग खतरनाक मंसूबों को अंजाम दे सकते हैं।

यह बात अलग है कि आसिफ का रिमोट पाकिस्तान में बैठे आईएसआई अफसर जाहिद के हाथ में रहा, मगर उसने कितने लोगों तक आसिफ के जरिये रुपये पहुंचवाए, यह छानबीन होनी बाकी है। आसिफ से पूछताछ में फिलहाल अफसरों को यही मालूम चला है कि वह आईएसआई अफसर जाहिद द्वारा बताए लोगों तक रुपये पहुंचाता था। सूत्रों से जानकारी मिली है कि मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, शामली, हापुड़ और गाजियाबाद में भी आसिफ ने कुछ लोगों से संपर्क साध रखा था।

पाकिस्तान के सिम से करता था बातचीत

आसिफ के पास से छह सिम कार्ड मिले, जिसमें से एक पाकिस्तानी कंपनी जोंग का है। इसी नंबर का इस्तेमाल वह पाकिस्तान में बैठे अपने आका आईएसआई अफसर जाहिद से बातचीत में करता था। बाकी सिम कार्ड स्थानीय स्तर पर अपने परिचितों से बातचीत में प्रयोग करता था। इन नंबरों के जरिये भी एसटीएफ आसिफ का नेटवर्क खंगालेगी।      

6500 रुपये प्रतिमाह की नौकरी
आसिफ वैसे तो मेरठ में खुद को मजदूर की तरह रखता था। सुभाष बाजार स्थित स्प्रिंग बनाने की फैक्ट्री में मजदूरी करता था। वहां उसे 6500 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। आईएसआई के संपर्क में आने के बाद उसकी कमाई का ग्राफ बढ़ता गया। कभी वह पाकिस्तान जाकर नकदी लाता, तो कभी उसके खाते में पैसा ट्रांसफर होकर आता रहा। उसमें से कुछ रुपया उन लोगों तक पहुंचाया, जो आईएसआई से जुड़े थे।

पाकिस्तानी हो सकता है आसिफ
पुलिस का दावा है कि आसिफ मूल रूप से मेरठ का रहने वाला है। उसका घर मोहल्ला पूर्वा फैय्याज अली में है, मगर सूत्रों से जानकारी मिली है कि आसिफ करीब 20 साल से यहां रह रहा है। ऐसा भी हो सकता है कि आसिफ भी पाकिस्तान से आ गया हो और अपने फर्जी दस्तावेज बनवा डाले। उसके पहचान पत्र और अन्य कागजात भी जांच के दायरे में हैं।

चिह्नित हैं आईएसआई एजेंटों के शरणदाता
पश्चिमी उतर प्रदेश में आईएसआई एजेंटों को शरण देने वालों की सूची तीन साल पहले तैयार हो चुकी है। मेरठ जोन में ऐसे करीब 150 लोग चिह्नित हैं। मगर खुफिया विभाग और पुलिस सिर्फ सूची बनाने तक ही सिमट गई। उससे आगे काम नहीं हो सका।

कई सैन्य यूनिटों में थी आसिफ की गहरी घुसपैठ

आसिफ अली के पास से मिले दस्तावेज से साबित होता है कि मेरठ ही नहीं पश्चिम यूपी सब एरिया मुख्यालय के अधीन आने वाली सैन्य छावनियों में उसकी गहरी घुसपैठ थी। आसिफ सैन्य जानकारी जुटाने में माहिर था और सेना में कार्यरत लोगों से उसके संपर्क थे।

सैन्य सूत्रों की मानें तो सेना के अंदर खुसपैठ बनाने की कवायद और सक्रियता आसिफ अली ने बीते पांच से छह सालों में बढ़ा दी थी। आसिफ के पास से बरामद किया गया सैन्य यूनिट ले-आउट और अहम दस्तावेज बगैर गहरी घुसपैठ के नहीं पाया जा सकता। सैन्य सूत्रों के अनुसार निश्चित तौर पर या तो आसिफ ने खुद उस इंफेंट्री डिवीजन की सैन्य यूनिट का भ्रमण किया होगा या फिर उसे किसी सेना से जुड़े व्यक्ति ने ले-आउट तैयार करके दिया होगा। दोनों ही सूरतों में यह काम बगैर घुसपैठ और सैन्य यूनिट में संपर्क के संभव नहीं है।

आसिफ से मिली जानकारी और बरामद दस्तावेज से सवाल खड़ा होता है कि सेना के अंदर कौन है जो इस एजेंट के लिए काम कर रहा है। सूत्रों की मानें तो इससे कतई इंकार नहीं किया जा सकता है कि आसिफ के संपर्क में सैन्य यूनिट के लोग थे। सेना के अंदर ऐसे लोगों को तलाश करना सेना के लिए बड़ी चुनौती है। सेना के लिए चिंता और जांच का विषय है कि आठ साल से आईएसआई के लिए काम कर रहा आसिफ अब तक मेरठ समेत पश्चिम सब एरिया मुख्यालय की अन्य छावनियों के कितने अहम दस्तोवज सीमा पार भेज चुका है।
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आठ साल से आईएसआई के संपर्क में रहा

आठ साल से आसिफ आईएसआई के संपर्क में था। स्थानीय खुफिया विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। आईबी और मिलिट्री इंटेलीजेंस ने उसे रडार पर लिया, तो स्थानीय खुफिया विभाग की पोल खुलकर सामने आ गई। आसिफ के बारे में खुफिया विभाग को कोई सूचना नहीं मिल सकी। यह बात इसलिए भी चौंकाती है, क्योंकि मेरठ में इंटेलीजेंस का रेंज ऑफिस है।

मेरठ के अलावा नौ जिलों की जानकारी जुटाई जाती है। इसके लिए पूरा अमला काम में लगा है। एलआईयू के सीओ और उनके अधीनस्थ इंस्पेक्टर तथा सब इंस्पेक्टरों के अलावा सिपाही भी काम करते हैं।

शातिर आसिफ जितनी बार भी पाकिस्तान गया, हर बार पत्नी रुकसाना कौसर, बेटी और बेटे से मुलाकात का बहाना बनाया। इस बहाने के पीछे उसका मकसद आईएसआई अफसरों से मुलाकात करना होता था। आसिफ की इस चालाकी को खुफिया विभाग भांप नहीं सका।
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