फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस वजह से बचे रहे नेता, वर्ना और भड़कता जनता का गुस्सा!

विज्ञापन
विज्ञापन
चुनावी महासंग्राम की इस बेला में बिजली संकट से जूझ रहे उत्तरी राज्यों के सत्तासीन नेताओं को मौसम ने भारी राहत दे दी है।
विज्ञापन


यदि पश्चिमी विक्षोभ के चलते अप्रैल में बारिश जैसा मौसम न होता तो आज उत्तर भारत के राज्य बिजली के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे होते।

जाहिर है कि ऐसे में सत्ता विरोधी लहर से जूझ रहे नेता बिजली गुल होने से उपजी मतदाताओं की नाराजगी भी झेल रहे होते।

मई में बढ़ेगा बिजली का संकट

इस बार मौसम ने चुनाव प्रचार में व्यस्त नेताओं को फिलहाल भीषण गरमी से राहत दे रखी है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते पहाड़ी राज्यों में लगातार बारिश हो रही है।

मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश जैसा मौसम है। पहाड़ी राज्यों में घटे तापमान का सीधा असर मैदानी क्षेत्रों में पड़ा है। इससे बिजली की मांग अप्रैल के पहले हफ्ते की तुलना में घट गई है।

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक मई में गरमी बढ़ने के साथ ही बिजली संकट भी बढ़ेगा। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के आंकड़े गवाह हैं कि पहली अप्रैल को पारा चढ़ने पर उत्तरी राज्यों की बिजली की मांग 33,203 मेगावाट के पार पहुंच गई थी। अब यह मांग घटकर 31,088 मेगावाट पर पहुंच गई है।

तो 40 डिग्री के करीब होता पारा

मौसम सुहाना न होता तो दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका होता, जो अभी 33 से 35 डिग्री सेल्सियस है। इसके बावजूद उत्तरी राज्यों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व चंडीगढ़ को छोड़ बाकी राज्य बिजली की कमी से जूझने लगे हैं।

केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के एक आला अफसर का कहना है कि यदि बेमौसम की बारिश न होती तो उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली जैसे राज्य या तो उत्तरी ग्रिड से अपने कोटे से ज्यादा बिजली ले रहे होते अथवा दूसरे राज्यों से महंगे दामों पर बिजली खरीद रहे होते।

दो साल पहले विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को बिजली सप्लाई के मामले में खुश रखने के लिए तब की उत्तर प्रदेश सरकार ने महंगे दामों पर बिजली खरीदी थी।
विज्ञापन

यूपी, पंजाब और हरियाणा को बड़ी राहत

बहरहाल, इस सुहाने मौसम ने सबसे ज्यादा राहत उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा को दी है। उत्तरी राज्यों में बृहस्पतिवार को 2.99 करोड़ यूनिट बिजली की कमी थी, जबकि शुक्रवार को यह कमी मात्र 1.30 करोड़ यूनिट रह गई।

उत्तर प्रदेश, पजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली अभी से बिजली संकट से जूझने लगे हैं। हालांकि संकट ने अभी विकराल रूप नहीं लिया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें