कांग्रेस पर अड़चन पैदा करने वाला दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि केंद्र सरकार आर्थिक सुधारों के साथ 8 फीसदी विकास दर हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) अधिनियम, भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन, गैर कोयला खनिजों की नीलामी को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकार में प्रमुख आर्थिक विभाग ऐसे लोग संभाल रहे हैं, जिन पर अतीत का कोई बोझ नहीं है।
यहां एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, ‘इन सब बदलावों से निश्चित तौर पर माहौल और मूड में परिवर्तन आया है। निवेशकों की निगाहें अब फिर से भारत पर हैं। मुझे पता है कि कुछ लोग बाधा डालने की कोशिश करेंगे, लेकिन देश का मूड इसके विपरीत है। इसी वजह से अड़चनें ज्यादा देर तक नहीं रह सकेंगी।’
जेटली ने आगे कहा, ‘इस बार जब हम इस एजेंडे पर चल निकलेंगे, तो इन कदमों को देश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए जरूरी कदम माना जाएगा। मुझे पूरा यकीन है कि जमीनी स्तर पर हो रहे बदलाव और आंकड़े अपने आप सारी बात कह देंगे।’
जेटली ने की कांग्रेस की आलोचना
सरकार, विपक्ष, न्यायपालिका और विधानमंडल से साझा दृष्टिकोण की मांग करते हुए जेटली ने कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘ऐसा लग रहा है, जैसे पार्टी कह रही हो कि अब मैं सत्ता में नहीं हूं, इसलिए मुझे अड़चनें पैदा करनी चाहिए। अब मैं सरकार में नहीं हूं, इसलिए अब मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। इसलिए मुझे सिर्फ अड़चनें पैदा करनी है।’
वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी ने आर्थिक मामलों से जुड़े मंत्रालयों में मोदी ने युवाओं को इसलिए रखा है क्योंकि उन पर अतीत का कोई दबाव नहीं होता। साथ ही उनके पास ताजा सोच होती है और वे बहुत तेजी से सीखते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गैर कोयला खनिजों के आवंटन के लिए ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया पर काम कर रही है।
वहीं केंद्र सरकार जल्द ही वित्तीय क्षेत्र के सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) की कानूनी व प्रशासनिक सिफारिशों को लागू करने जा रही है। आयोग ने देश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय क्षेत्र के नियमों में बदलाव की बात कही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘आर्थिक सुधार के लिए बदलाव की प्रक्रिया जारी है और मुझे कोई शक नहीं है कि बहुत ही जल्द एफएसएलआरसी की सिफारिशों को लागू कर लिया जाएगा।’