चुनावी मौसम में सियासी हमले करते वक्त इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि हथियार कौन सा चुना जाए और निशाना कहां लगाना है। यही वजह है कि कभी नरेंद्र मोदी की पत्नी पर बवाल मचता है और कभी गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर।
हाल में भाजपा नेता उमा भारती ने बयान दिया कि अगर मोदी पीएम बने, तो रॉबर्ट वाड्रा को जेल में डाला जाएगा। जाहिर है, इस बयान पर बवाल मच गया। लेकिन मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा कि वो बदले की राजनीति से कोई काम नहीं करेंगे और कानून अपना काम करेगा।
मोदी के बयान के बाद ऐसा लगा कि मामला ठंडा पड़ सकता है, लेकिन अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रॉबर्ट वाड्रा पर लंबा चौड़ा लेख लिखकर यह आग दोबारा भड़का दी है। इस लेख में रॉबर्ट वाड्रा को लेकर कई खुलासे किए गए हैं, जो शायद पहले कभी नहीं हुए।
वाड्रा के प्रवक्ता ने दी सफाई
दिग्गज अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है कि जब रॉबर्ट वाड्रा ने जमीन खरीदनी शुरू की, उसके बाद केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रमोट करने की योजना का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में जमीन की काफी जरूरत थी, जिसके लिए यह इलाका मुफीद था।
डब्ल्यूएसजे ने लिखा है, "वाड्रा ने जमीन खरीदनी जारी रखी और 2011 में राज्य ने भी सोलर इनसेंटिव का ऐलान किया। जमीनी सौदा का ब्योरा बताता है कि जो जमीन वाड्रा ने खरीदी, तीन साल में उसकी कीमत छह गुना बढ़ी।"
अधिकारियों का कहना है कि इस बात की जांच चल रही है कि कहीं इन सौदों में कहीं कोई कानूनी उल्लंघन तो नहीं हुआ। हालांकि वाड्रा के प्रवक्ता का कहना है कि यह सब राजनीतिक कारणों की वजह से उन्हें बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा, "वाड्रा ने सभी कानूनी नियमों का पालन किया है और उन्हें आगे कुछ नहीं कहना।"
दसवीं पास वाड्रा के पास थे 240 करोड़
इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने वाड्रा की कुछ डील की आलोचना की और उन पर एक प्रॉपर्टी डेवलपर के साथ सौदेबाजी के जरिए पैसा बढ़ाने का आरोप लगाया। इसके अलावा यह खुलासा भी आपके होश उड़ा देगा।
डब्ल्यूएसजे के मुताबिक 44 वर्षीय वाड्रा सिर्फ दसवीं पास हैं और उनके पास प्रॉपर्टी डेवलपमेंट में कोई अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने बड़ा रियल एस्टेट पोर्टफोलियो तैयार किया।
अखबार के अनुसार, "कंपनी फाइलिंग, जमीन के रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी एक्सपर्ट के साथ हुए इंटरव्यू की समीक्षा के आधार पर जर्नल ने आंका कि 2012 में उन्होंने 1.2 करोड़ डॉलर की प्रॉपर्टी बेची और तब भी उनके पास 240 करोड़ रुपए की संपत्ति थी। वाड्रा की कंपनियों ने इसके बाद कोई रियल एस्टेट बेचा या नहीं, इसकी जानकारी नहीं, क्योंकि पिछले दो साल में सरकारी वेबसाइट पर इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।"
1997 में रचाई थी प्रियंका संग शादी
विदेशी अखबार के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा उस वक्त सियासी सुर्खियों का हिस्सा बने, जब 1997 में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया की बेटी प्रियंका गांधी से शादी रचाई। साल 2004 में जब कांग्रेस सोनिया की अगुवाई में दोबारा सत्ता तक पहुंची, तो वाड्रा सस्ती कास्ट्यूम ज्वेलरी निर्यात करने का छोटा कारोबार चला रहे थे।
2007 के अंतिम दौर में वो रियल एस्टेट कारोबार में कूदे और स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी बनाई। कंपनी की फाइलिंग के मुताबिक उस वक्त कंपनी के पास सिर्फ 1 लाख 20 हजार रुपए थे।
2008 की शुरुआत में कंपनी ने करीब आठ करोड़ रुपए में गुड़गांव में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी। दो महीने बाद वाड्रा ने कांग्रेस की अगुवाई वाली राज्य सरकार के पास आवेदन दाखिल करा इसे खेती की जमीन से कमर्शियल में बदलने का आग्रह किया। 18 दिन बाद मंजूरी मिल गई और जमीन के दाम खुद ब खुद बढ़ गए।
सात गुना ज्यादा रकम पर हुआ सौदा
अखबार के मुताबिक अगले चार साल के दौरान रियल एस्टेट डेवलपर डीएलएफ ने करोड़ों डॉलर वाड्रा की कंपनी में डाले और बैलेंस शीट में इसे लोन की तरह दिखाया गया। 2012 में डीएलएफ ने कहा कि उसने वाड्रा की कंपनी से करीब 60 करोड़ रुपए में जमीन खरीदी है। यह खरीद कीमत से सात गुना ज्यादा थी।
हरियाणा में एक आला अफसर अशोक खेमका ने इस डील पर गौर किया और कहा कि जब 2008 में यह सौदा हुआ था, तो वाड्रा की कंपनी के पास भुगतान के पैसे तक नहीं थे। खेमका ने अनियमितताओं का संदेह जताते हुए डील रद्द करने की बात कही।
इसके तुरंत बाद कांग्रेसी नेता और हरियाणा के मुख्यमंत्री ने खेमका के ट्रांसफर के आदेश दे दिए। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह सौदेबाजी डीएलएफ के लिए गांधी परिवार को प्रॉपर्टी देने के लिए रची गई साजिश थी।
हरियाणा के बाद राजस्थान में हुआ खेल?
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक कांग्रेस के अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया और राहुल गांधी ने भी कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनके कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि वो इन दिनों चुनाव प्रचार में काफी मसरूफ हैं।
हरियाणा के अलावा वाड्रा ने कई जमीनी सौदे राजस्थान में भी किए। कुछ ब्रोकरों ने बताया कि यह सौदे काली एसयूवी में बैठे एक शख्स के जरिए होते थे और इसकी शुरुआत 2009 में हुई। उस वक्त राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।
2009 से 2012 के बीच वाड्रा की कंपनियों ने करीब 10 लाख डॉलर में राजस्थान में दो हजार एकड़ जमीन खरीदी। ज्यादातर प्रॉपर्टी सूबे के पश्चिमोत्तर कॉरिडोर पर है। जानकारों के मुताबिक एनर्जी एक्सपर्ट इसे सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए बढ़िया जगह मानते हैं, क्योंकि यहां सूरज की रोशनी तेज है और जमीन सस्ती है।
कौन है रॉबर्ट वाड्रा?
रॉबर्ट वाड्रा का जन्म 18 मई, 1969 को राजेंद्र और मौरीन वाड्रा के यहां हुआ। राजेंद्र उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले थे और रॉबर्ट की मां का ताल्लुक स्कॉटलैंड से था। राजेंद्र ब्रास और वुड हैंडीक्राफ्ट कारोबार में शामिल थे।
उनका परिवार पाकिस्तान के सियालकोट से ताल्लुक रखता है और राजेंद्र के पिता विभाजन के वक्त हिंदुस्तान आ बसे थे। ब्रिटिश स्कूल में पढ़ने वाले रॉबर्ट का एक भाई रिचर्ड और एक बहन मिशेल है।
वाड्रा की मुलाकात प्रियंका से तब हुई, जब वो 13 साल की थी। दोनों की शादी 1997 में हुई। दोनों के दो बच्चे हैं। बेटे का नाम रेहान और बेटी का मिराया। वाड्रा फिटनेस को लेकर काफी दिलचस्पी रखते हैं। प्रियंका से रिश्ते की वजह से राजेंद्र और रॉबर्ट के बीच रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे। 2009 में राजेंद्र की लाश मिली। इससे पहले 2003 में रिचर्ड ने खुदकुशी कर ली थी और 2001 में मिशेल की कार हादसे में मौत हो गई।
सोलर पावर कंपनियों ने बढ़ाए दाम
डब्ल्यूएसजे अखबार के मुताबिक भाजपा के सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, "जब हमारा इलाका सोलर पावर सेंटर बना, तो हमें पता चला कि वाड्रा ने हमारी सारी जमीन किसानों से सस्ते दामों पर खरीद ली है।"
सोलर पावर कंपनियों के वहां पहुंचने से जमीन की कीमत में और उछाल आया। जनवरी 2012 में उनकी कंपनी ने 94 एकड़ का एक प्लॉट बेचा, जो 2010 में खरीदा गया था। इसके दामों में 10 गुना इजाफा आ चुका था।
जमीन के रिकॉर्ड बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर वाड्रा की नुमाइंदगी महेश नागर करते हैं। कांग्रेसी नेता के भाई नागर ने कहा कि वो वाड्रा या राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते।
दीवारों पर टंगी सोनिया, राहुल की तस्वीर
हालांकि, विदेशी अखबार ने जिस दफ्तर में बैठकर उनका इंटरव्यू किया, उसकी दीवार पर राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की तस्वीर लगी थी। उनका कहना है कि एक मध्यस्थ ने उन्हें अथॉरिटी लेटर लाकर दिए, ताकि मेसर्स वाड्रा एंड गांधी के नाम पर जमीन रजिस्टर हो सके।
रियल्टी ब्रोकर और स्थानीय अधिकारी का कहना है कि जब वाड्रा ने राजस्थान में जमीन खरीदनी शुरू की, तो काली एसयूवी के भीतर से पैसा नागर ने ही दिया। वो स्वीकार करते हैं कि उन्होंने कई साल वाड्रा के जमीनी सौदों का जिम्मा संभाला है। लेकिन यह भी कहा कि उन्हें याद नहीं कि उन्होंने कभी काली एसयूवी इस्तेमाल की हो।
स्थानीय लोग कभी नहीं भूलेंगे। स्थानीय डीलर ललित रमावत ने कहा, "उन्होंने कितनी जमीन खरीदी, आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। हमने कभी ख्वाबों में भी नहीं सोचा था कि हमारी जमीन इतनी कीमती हो जाएगी।"
वसुंधरा राजे करा रही हैं जांच-पड़ताल
अखबार के मुताबिक राजस्थान के स्थानीय मीडिया में वाड्रा की चर्चा पिछले दो साल से है। सूबे में भाजपा सरकार आने के बाद इस बात की जांच के आदेश दिए गए कि वाड्रा ने कितनी जमीन खरीदी है और क्या ऐसा करते वक्त कानून का उल्लंघन किया गया।
नई सरकार वाड्रा से जुड़े सभी जमीनी सौदों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। वसुंधरा राजे के कैबिनेट मंत्री ने बताया कि अधिकारी इन सौदों की समीक्षा कर रहे हैं।
नागर का कहना है, "प्रॉपर्टी और जमीन खरीदने का सौदा कौन नहीं कर रहा? लोग सिर्फ वाड्रा को इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद हैं।"