सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा है कि अगले साल के लोकसभा चुनावों में चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के साथ ही कागज की पर्ची देने की व्यवस्था शुरू की जाए।
अदालत ने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिये यह आवश्यक है और इससे मतदाताओं का विश्वास बहाल होगा।
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर कहा कि मतदान पर्ची प्रणाली से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित होगा और विवादों के निपटारे में भी आसानी होगी।
उसने आयोग को इस प्रणाली को 2014 के लोकसभा चुनावों में चरणबद्ध ढंग से लागू करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि ईवीएम के साथ ही कागज की पर्ची मुहैया कराने की वीवीपीएटी व्यवस्था लागू करने के लिये निर्वाचन आयोग को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
अदालत ने कहा कि यह मतदान व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा जो विवाद होने की स्थिति में हाथों से मतगणना करने में भी मददगार होगा। इस प्रणाली में वोट डाले जाने के बाद मतदाता को मशीन के अंदर एक पर्ची दिखाई पड़ती है।
इस पर उस उम्मीदवार का नंबर, नाम और चुनाव चिन्ह दर्ज होता है, जिसे उसने वोट दिया है। थोड़ी देर बाद यह पर्ची एक बक्से में गिर जाती है। चुनाव नतीजे पर विवाद की स्थिति में इन पर्चियों को गिन कर प्रत्येक उम्मीदवार को मिले वोटों का पता लगाया जा सकता है।