सर्वोच्च न्यायालय ने एलपीजी नकद सब्सिडी लाभ के लिए अगर आधार की अनिवार्यता को खत्म किया तो पेट्रोलियम मंत्रालय दूसरे विकल्पों के जरिए इस योजना को जारी रखेगा।
आधार के अलावा मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, लाइसेंस या दूसरे दस्तावेजों के जरिए रसोई गैस उपभोक्ता की पहचान कर मंत्रालय उन्हें नकद सब्सिडी का लाभ दे सकता है।
आधार का विकल्प ढूंढने में जुटे मंत्रालय के अधिकारियों ने इसके संकेत दिए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आधार की अनिवार्यता खत्म होने से बेशक चुनौतियां बढ़ेगी।
कुछ लोगों के लिए नकली दस्तावेजों के जरिए नकद सब्सिडी का लाभ पाने का रास्ता खुल सकता है। जबकि आधार इससे निजात दिलाने का सबसे बेहतर माध्यम है। इसलिए मंगलवार को सरकार अपनी दलीलों के जरिए सर्वोच्च न्यायालय को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने पर दूसरे विकल्पों को आगे लाया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार
इन दस्तावेजों की प्रमाणिकता के आधार पर भी उपभोक्ताओं को नकद सब्सिडी का लाभ दिया जा सकता है। हालांकि दूसरे विकल्प पर अमल किया गया तो ग्राहकों को प्रमाणित करने के लिए एक साथ कई दस्तावेज देने पड़ सकते हैं। फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
हलफनामे में बताई आधार की विशेषता
सूत्रों के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय ने हलफनामे में आधार की विशेषता को बताया है। यह कहा गया है कि विशेष पहचान संख्या मल्टीपल कनेक्शन, सिलेंडरों की कालाबाजारी और गैस की चोरी जैसी समस्याओं से निजात दिलाने का बेहतर माध्यम है। जबकि किसी अन्य दस्तावेज के जरिए ऐसा करना चुनौतीपूर्ण है।
ग्राहकों को दिया गया है 90 दिन का समय
महत्वपूर्ण यह है कि 1 नवंबर से देश के 46 जिलों में शुरू होने वाली आधार लिंक एलपीजी सब्सिडी योजना में आधार को अनिवार्य बनाने पर जोर नहीं दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि अब तक जिन जिलों में यह योजना शुरू हुई है वहां आधार को बैंक खाते और एलपीजी उपभोक्ता नंबर से लिंक कराने के लिए ग्राहकों को 90 दिनों का समय दिया गया है। उम्मीद है कि तीन माह के पहले ही आधार की अनिवार्यता पर निर्णय आ जाएगा।