मध्य प्रदेश के रत्नागिरि मंदिर में हाल में एक छोटी सी अफवाह पर मची भगदड़ से पांच दर्जन से ज्यादा लोगों को जान गंवानी पड़ी जबकि पटना के गांधी मैदान में जहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे, रैली के बीच व आसपास सिलसिलेवार धमाकों के बावजूद हजारों लोगों का शांत बने रहना एक बड़ा आश्चर्य माना जा रहा है।
बिहार की इस घटना से अन्य राज्यों के लोग भी सबक ले सकते हैं। यह कहना बिल्कुल सही है कि इस विशाल रैली की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे ही थी।
वास्तव में पटना में आतंकियों के मंसूबों को जनता ने ही ध्वस्त किया है। खुफिया एजेंसियां भी मान रही हैं कि बम धमाकों में शामिल आतंकी संगठन का मकसद रैली में भगदड़ मचाना ही था, ताकि बेलगाम भीड़ के चलते ज्यादा से ज्यादा जानें चली जाएं।
हालांकि इसके लिए भाजपा नेताओं की रणनीति भी कुछ हद तक कामयाब रही, जिन्होंने अंत तक यह भनक नहीं लगने दी कि रैली में बम फट रहे हैं। रैली में शामिल ज्यादातर लोग अंत तक भाजपा नेताओं की इस बात पर यकीन करते रहे कि मोदी के स्वागत में आतिशबाजी हो रही है, पटाखे फूट रहे हैं।
गुजरात पुलिस ने दी रैली में नहीं जाने की सलाह
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली मानते हैं कि जब रैली में बम फूटने लगे तो भाजपा नेताओं को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की हुई कि गांधी मैदान में भगदड़ मचने से कैसे रोका जाए।
नरेंद्र मोदी को एयरपोर्ट पर ही सूचना दे दी गई थी और गुजरात पुलिस ने उन्हें रैली में नहीं जाने की सलाह दे दी थी। हालांकि इससे अफवाह और फैल जाती व तब भीड़ को नियंत्रित कर पाना आसान नहीं होता।
यह भी संदेश जाता कि आतंकी हमले के भय से मोदी भाग गए। इसलिए तय किया गया कि रैली में संक्षिप्त भाषण देकर खत्म कर दिया जाए।
फूल गए थे भाजपा नेताओं के हाथपांव
रैली में पहुंचकर जब स्थिति देखी तो मोदी, राजनाथ व जेटली के हाथपांव फूल गए, वहां ऐसे कोई इंतजाम नहीं थे कि आपातकाल में नेताओं को सकुशल बाहर निकाला जा सके।
इसके बाद गुजरात के पुलिस अफसरों ने कुछ कारें लगा दी ताकि इमरजेंसी में मोदी व अन्य को बाहर निकाल लिया जाए। तब तक आसपास छह बम फट चुके थे। इसलिए सोचा गया कि और बम धमाके होने होंगे तो मोदी के मंच पर पहुंचते ही हो जाएंगे।
रात को तैनात थे पुलिस के मात्र चार जवान
इसके बाद मोदी को मंच पर भेजा गया लेकिन जब देखा कि सब शांत है तो रैली आगे बढ़ने लगी। रैली के सुरक्षा इंतजाम इस कदर ढीले थे कि रात को पुलिस के मात्र चार जवान गांधी मैदान की सुरक्षा के लिए तैनात थे। भाजपा को 1700 निजी सुरक्षा गार्ड तैनात करने पड़े। रैली में प्रवेश करते वक्त मैटल डिटेक्टर जांच तो दूर पुलिस किसी से पूछताछ भी नहीं कर रही थी।