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बहुगुणा पर नजरें तिरछी पर सीएम की कुर्सी सलामत

Tue, 02 Jul 2013 01:49 AM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
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कांग्रेस हाईकमान उत्तराखंड की त्रासदी के बाद उपजी परिस्थितियों से निपटने में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सरकार की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है।
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मगर संकट की इस घड़ी में पार्टी कोई कड़ा फैसला लेकर विपक्ष को राजनीतिक बढ़त देने के मूड में नहीं है। खासकर बहुगुणा के भविष्य को लेकर पार्टी फिलहाल कोई सख्त फैसला नहीं लेना चाहती।

इसी क्रम में प्रदेश के सभी कांग्रेस सांसदों और विधायकों को भी समझा दिया गया है कि वे फिलहाल शांत रहें और ऐसी कोई नकारात्मक बात न कहें जिससे कि विपक्ष को अंगुली उठाने का मौका मिले।
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उत्तराखंड की त्रासदी के बाद लापरवाही और खामियों के आरोपों को लेकर जिस तरह से विपक्ष ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को चौतरफा घेर लिया है। उसे देखते हुए कांग्रेस हाईकमान खुद मोर्चा संभालकर बहुगुणा सरकार के बचाव में उतर आया है।

अंबिका सोनी ने देहरादून में पिछले दो दिनों में सांसदों और विधायकों से मुलाकात की और उनसे दो टूक शब्दों में कहा गया है कि हाईकमान इस समय किसी तरह की नकारात्मक बयानबाजी नहीं चाहता। अंबिका ने पार्टी नेताओं को समझाया है कि यह वक्त आपस में लड़ने का नहीं बल्कि विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का है।

उत्तराखंड की तबाही के लिए राज्य सरकार में जवाबदेही तय करने के सवाल पर कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने कहा कि यह समय जिम्मेदारी तय करने का नहीं है बल्कि अभी पूरा ध्यान राहत और बचाव अभियान पर है। यह प्राकृतिक आपदा है न कि मानव निर्मित त्रासदी।

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यही नहीं पार्टी की ओर से उत्तराखंड सरकार के राहत और बचाव अभियान का मुखर तरीके से प्रचार करना भी शुरू हो गया है। साथ ही राजनीतिक माहौल को भांपते हुए विशेष तौर पर मुख्यमंत्री का बचाव करना हाईकमान की मजबूरी हो गया है।

माकन ने सोमवार को कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी जिला अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में खाने की सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री हर प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं।

वहीं पार्टी के एक महासचिव ने बहुगुणा के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के सवाल पर अनौपचारिक तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री को लेकर केंद्रीय और प्रदेश स्तर पर नाराजगी बढ़ी है।
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खासकर मुख्यमंत्री की दिल्ली में मौजूदगी और गैर जरूरी बयानों को लेकर भी नाराजगी है। मगर त्रासदी के समय कोई फौरी फैसला न लेकर बाद में राजनीतिक परिस्थितियों की समीक्षा करने के बाद ही इस सिलसिले में अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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