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तो भाजपा के लिए आसान नहीं वसुंधरा का इस्तीफा

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ललित मोदी विवाद में भाजपा के लिए राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का इस्तीफा लेना आसान नहीं होगा। राजस्थान के मामले में राजे ने खुद को पार्टी का सर्वेसर्वा घोषित किया हुआ है।
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बीते दिनों राजे के समर्थक मंत्री राजेंद्र राठौर ने यह बयान देकर इस बात को पुख्ता किया था कि न तो उनके विधायक दिल्ली गए हैं, न जाएंगे।

बताया जा रहा है कि राजे के कामकाज का अंदाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरीखा है। वर्ष 2008 में राजे आलाकमान को एक बार झुका चुकी हैं। उस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर राजनाथ सिंह थे।

राजनाथ ने राजे से सूबे की विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष से त्यागपत्र देने का फरमान जारी कर दिया था। मगर राजे ने आलाकमान के फरमान की अनदेखी की थी।

माना जा रहा है कि भाजपा आलाकमान को राजे का तब का रवैया अब भी याद है। इसलिए वह चाहकर भी उनपर इस्तीफे का दबाव नहीं बना सकता है।

वसुंधरा को झुकाना मुश्किल

वैसे जनाधार के मामले में सूबे में ऐसा कोई नेता नहीं है, जो राजे का मुकाबला कर सके। सबकी नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ओर गड़ी हैं। पीएम मोदी के ट्रैक रिकार्ड की तो वे भी दबाव में आकर सियासत करने के आदी हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके मंत्रियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार से लेकर तमाम मामले सामने आए।

मगर मोदी ने कभी किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया। बाबू भाई बुखारिया का मामला हो या पुरुषोत्तम सोलंकी का दोनों ही नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। मगर मोदी ने इनसे त्यागपत्र नहीं लिया। यही नहीं माफिया की छवि वाले विट्ठल रादडीया सरीखे नेता को मोदी ने कांग्रेस से लाकर सांसद का चुनाव लड़वाया।

बताया जा रहा है कि ललित मोदी समेत तमाम विवादों में भी मोदी पुराने अंदाज को अपनाएंगे। ऊपर से संघ ने भी मोदी को मीडिया के दबाव में आकर सियासी फैसले न लेने की छूट दे दी है।
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हस्ताक्षर वाला शपथपत्र मिलते ही कांग्रेस और हमलावर

आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के समर्थन में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा के हस्ताक्षर का शपथपत्र मिलने के बाद कांग्रेस ललित मोदी विवाद पर केंद्र सरकार के खिलाफ ज्यादा हमलावर दिख रही है। मोदी सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए पार्टी इस शपथपत्र को सियासी बारूद मानकर चल रही है।

पार्टी ने इस विवाद में उच्च नैतिकता का पालन करने की तैयारी करते हुए मामले में किसी कांग्रेस नेता का नाम आने के बाद नरमी न बरतने का भी संकेत दिया है। राहुल ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे ललित मोदी विवाद में मोदी सरकार को घेरने में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ें।

इसका असर होता दिख रहा है। सोनिया, राहुल और प्रियंका के विदेश में रहने के बावजूद भी कांग्रेस के दूसरे दर्जे के नेताओं ने ही मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर आक्रमण को धार दे रखी है। वसुंधरा के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस पार्टी सुषमा स्वराज और स्मृति ईरानी को भी छोड़ने को तैयार नहीं है।

ऊपर से महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे की अनियमितता का मामला सामने आने के बाद उसे एक और सियासी हथियार हाथ लग गया है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वसुंधरा को तो जाना ही होगा।

सचिन पायलट ने भी पीएम पर हमला बोलते हुए कहा है कि वसुंधरा राजे का दस्तावेज सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा में बैठे ललित मोदी के दोस्त उन्हें बचा रहे हैं। पीएम के एक ट्वीट पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस ने कहा है कि विदेश में एक भारतीय भगोडे़ को संरक्षण देना ही राष्ट्रीय हित है।

दरअसल पीएम ने 14 जून 2014 को किए गए एक ट्वीट में कहा था कि राष्ट्र हित में कड़े निर्णय लेने का समय आ गया है। हम जो भी निर्णय लेंगे, वह राष्ट्रहित में होगा।
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