प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भविष्य में भी पार्टी के बुजुर्ग और हाशिये पर डाल दिए गए नेताओं का ताना सुनना पड़ेगा। दरअसल, इन नेताओं ने समय-समय पर मोदी-शाह की कार्यशैली पर निशाना साधने की रणनीति बनाई है।
इस क्रम में अब इस ताकतवर सियासी जोड़ी को आपातकाल की 40वीं वर्षगांठ पर आयोजित पार्टी के समारोह में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को नहीं बुलाए जाने को लेकर एक और हमले का सामना करना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि बीते करीब एक महीने में पार्टी के चार बुजुर्ग नेताओं ने मोदी-शाह की कार्यशैली पर सीधे और परोक्ष हमला बोला है। इस हमले की शुरुआत वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने मोदी सरकार के नमामि गंगे योजना पर सीधा हमला बोल कर की थी।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा ने पार्टी में संवादहीनता का आरोप लगाते हुए शाह पर परोक्ष हमला बोला तो आडवाणी ने आपातकाल के बहाने पीएम मोदी पर परोक्ष रूप से ताना मारा।
इसी कड़ी में बुधवार को पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा था कि वर्ष 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद बुजुर्ग नेताओं को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। ललित मोदी प्रकरण के सामने आने के बाद बीते एक साल से चुप्पी साधे बैठा सरकार में शामिल नाराज गुट भी अचानक सक्रिय हुआ है।