उत्तराखंड तबाही के जख्म अभी भी हरे हैं। आसमान से बरसी आफत ने वहां भारी तबाही मचाई। तबाही के दर्द से अभी भी देवभूमि कराह रहा है। हालांकि इस दौरान सेना के जवान बाढ़ में फंसे लोगों के लिए देवदूत बनकर आए।
जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पीड़ितों को नई जिंदगी दी। जब बचाव अभियान के दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया तब भी सेना ने कदम पीछे नहीं हटाया।
देवदूत बने जवान
मूसलाधार बारिश की वजह से कई लोग बीच रास्ते में ही फंस गए। ऐसे में इन लोगों की मदद में सेना ने आगे बढ़कर हाथ थामा और उन्हें सुरक्षित जगह तक पहुंचाने में मदद की।
ऐसे मिली नई जिंदगी
उत्तराखंड में आई भयंकर तबाही को झेलने वाले लोगों के साथ्ा आज पूरा देश है। इन लोगों को प्रभावित इलाकों से निकालने में सेना के जवानों ने अहम भूमिका निभाई।
देश को नाज है जवानों पर
सेना ने इस दौरान दिखाया कि आज भी देश को इन पर क्यों नाज है। पीठ पर बच्चा और बूढ़ी अम्मा को सहारा देता यह जवान।
साथी हाथ बढ़ाना...
बचाव अभियान हो या फिर राहत सामग्री बांटने का काम, सेना के जवानों का प्रयास अतुलनीय था।
सेना न होती तो जिंदा नहीं लौट पाते
सीमा पर दुश्मनों को मात देने वाले सेना के जवानों का यहां अलग ही रूप देखने को मिला। सच में ये लोग किसी देवदूत से कम नहीं लगे।
उत्तराखंड तबाही के अनदेखे निशान