खुले में पेशाब करना एक अनैतिक कृत्य हो सकता है लेकिन यह किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचने का मामला नहीं है। कुछ ऐसा ही निर्णय दिया है गुजरात हाइकोर्ट ने। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार जस्टिस जेबी परदीवाला ने वडोदरा निवासी श्याम सुंदर धोबी और एक वकील चेतन गोरे के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 354 के तहत दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए गुरुवार को यह निर्णय दिया।
जानकारी के अनुसार महिला चाय विक्रेता उषा बेन ओडे ने श्याम सुंदर धोबी के खिलाफ उनकी स्टाल के निकट पेशाब करने के कारण अपने अपमान का मुकदमा दर्ज कराया था। महिला का आरोप था कि उनकी चाय के स्टाल के निकट पेशाब करने के कारण उनका अपमान हुआ है। महिला ने आरोपियों के खिलाफ धमकी देने और मारपीट करने का मामला भी दर्ज कराया था।
मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि किसी को बहुत आपातकालीन स्थिति में भी पेशाब आए तब भी खुले में पेशाब करना गलत है लेकिन इससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचता और न ही यह किसी के महिला के अपमान का कारण हो सकता है।