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पहले दिन हंगामे की भेंट चढ़ी संसद की कार्यवाही

Mon, 05 Aug 2013 09:19 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने पर विभिन्न दलों की ओर से जताई गई सहमति मानसून सत्र के पहले ही दिन तार-तार हो गई।
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सोमवार को संयुक्त आंध्र प्रदेश और अलग तेलंगाना के मसले पर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। इसी दौरान अलग बोडोलैंड बनाने की मांग भी उठी। तेलंगाना पर कांग्रेस सांसद दो फाड़ दिखे।

हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही तीन बार और राज्यसभा की कार्यवाही चार बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

इस बीच, दोनों सदनों ने उत्तराखंड त्रासदी पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। सत्र के पहले दिन लोकसभा में पांच नए सदस्यों ने शपथ ली तो दो सांसदों का इस्तीफा स्वीकार किया गया।
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लोकसभा की कार्यवाही पांच सदस्यों को शपथ दिलाने, 13 भूतपूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि देने और उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुई घटनाओं पर दुख जताने से शुरू हुई।

इसके बाद जैसे ही अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के लिए सदस्य का नाम पुकारा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना क्षेत्र के विभिन्न दलों के सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।

तेलंगाना समर्थक सांसद इसी सत्र में विधेयक लाने और हैदराबाद को तेलंगाना के हिस्से में रखने की मांग करने लगे। इसी दौरान कुछ सदस्य एकीकृत आंध्र प्रदेश के समर्थन में वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।

हंगामे के बीच तेदेपा सांसद एन. शिवा प्रसाद संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ की किसी टिप्पणी पर भड़क कर उनकी ओर लपके। मगर वेल में मौजूद कुछ सांसदों ने उन्हें रोक लिया।

दोनों सदनों में अलग बोडोलैंड की भी मांग उठी। लोकसभा में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के एसके बैसिमुथियारी और राज्यसभा में विश्वजीत दाइमरी पृथक बोडोलैंड की मांग के समर्थन में नारे लगाते देखे गए। दोनों ने अपने गले में बैनर लटका रखा था, जिस पर लिखा था अगर तेलंगाना तो बोडोलैंड क्यों नहीं।

तेलंगाना पर कैबिनेट नोट तैयार कर रही सरकार
तेलंगाना के गठन संबंधी मुद्दों को निपटाने के मकसद से सरकार कैबिनेट नोट तैयार कर रही है।

इस कैबिनेट नोट में जल समेत सभी संसाधनों और प्रशासनिक विभागों को बांटने से जुड़े प्रस्तावों का जिक्र होगा। नोट पर कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे दोनों सदनों में व्यापक बहस के लिए पेश किया जाएगा।

सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा के विपक्षी सांसदों की ओर से तेलंगाना पर बहस की मांग पर वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने बयान में यह जानकारी दी।

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के खराब स्वास्थ्य के चलते वित्त मंत्री को यह बयान देना पड़ा। हालांकि इस मुद्दे पर शोर शराबे के चलते दोनों सदनों की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी।

चिदंबरम ने कहा कि संविधान में नए राज्य के गठन के लिए पूरी प्रक्रिया और दिशानिर्देशों का जिक्र है। तेलंगाना के लिए सरकार उन्हीं निर्देशों को अपना रही है।

चिदंबरम के मुताबिक कैबिनेट नोट में सिर्फ पानी, बिजली उत्पादन और वितरण, पुलिस व प्रशासन का ही जिक्र नहीं होगा। इसके तहत उन सभी बातों पर भी गौर किया जाएगा, जिससे दोनों राज्यों के लोगों के मूलभूत अधिकार कायम रहें।
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चिदंबरम के बयान पर असंतोष जताते हुए विपक्षी भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैयानायडू ने कहा कि कांग्रेस को तेलंगाना मुद्दे से जुड़े सभी पक्षों का खयाल रखना चाहिए था।
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