सरकार की ओर से मुहैया लाल बत्ती और सुरक्षा का दुरुपयोग समाज के लिए खतरनाक है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। यह टिप्पणी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने की।
अदालत ने केंद्र सरकार को ऐसे नियम बनाने की नसीहत दी है जिससे संवैधानिक पदों के अलावा अन्य सभी को लाल बत्ती का दुरुपयोग करने से रोका जा सके।
जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस वी गोपाल गौड़ा की पीठ ने कहा कि उन लोगों पर सरकार को भारी और कठोर जुर्माना लगाने का प्रावधान करना चाहिए, जो लाल बत्ती और सुरक्षा का दुरुपयोग करते हैं। पीठ ने केंद्र को इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि नागरिकों के प्रति अलग रवैया नहीं अपनाया जा सकता है। साथ ही पीठ ने लाल बत्ती लगी गाड़ियों की वजह से लोगों को होने वाली दिक्कतों का भी जिक्र किया।
पीठ ने कहा कि यह समाज के लिए खतरा है। इसे रोकने के लिए सख्ती की जानी चाहिए और कठोर जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
अदालत उत्तर प्रदेश निवासी की ओर से लाल बत्ती और सुरक्षा के दुरुपयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाल ही में पीठ कह चुकी है कि लाल बत्ती आज के दौर में स्टेटस सिंबल बन गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि वीआईपी लोगों की सुरक्षा में लगे पुलिस वालों को सड़क सुरक्षा एवं इस तरह के अन्य कामों में लगाया जाना चाहिए।
केंद्र और सभी राज्यों को अदालत पहले ही यह बताने का निर्देश दे चुकी है कि कितने लोगों को केंद्रीय और राज्य की ओर से सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है।
गौरतलब है कि सरकार को अदालत ने उन लोगों के लिए सुरक्षा का नया तंत्र बनाने पर विचार करने को कहा है, जिन्हें जान का खतरा है।