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अखिलेश सरकार ने दुर्गा को भेजी चार्जशीट, मांगा जवाब

Mon, 05 Aug 2013 08:03 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क/ब्यूरो
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उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर लिया है। अखिलेश सरकार ने दुर्गा को चार्जशीट भेजकर 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा है।
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चार्जशीट में दुर्गा के निलंबन किए जाने के कारणों को स्पष्ट किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक दुर्गा शक्ति नागपाल में प्रशासनिक क्षमता की कमी है।

दुर्गा से पूछा गया है कि 27 जुलाई को नोएडा के कादलपुर गांव में मस्जिद की दीवार गिराने के समय कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया? इस मामले में उन्होंने सीनियर अधिकारियों की सलाह क्यों नहीं ली?

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इस चार्जशीट की एक कॉपी केंद्र सरकार (डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग) को भेजी गई है।

निलंबन के कारण
इधर यूपी के प्रमुख सचिव नियुक्ति राजीव कुमार ने केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को पत्र लिखकर दुर्गा के निलंबन के कारण बताए हैं। इसमें यह भी साफ किया गया है कि दुर्गा ने निलंबन आदेश के खिलाफ कोई भी अपील नहीं की है।
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केंद्र के समक्ष यदि इस संबंध में कुछ प्रस्तुत किया गया है, तो उसे तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि राज्य सरकार अपने कमेंट्स दे सके। केंद्र को यह भी बताया गया है कि दुर्गा को आरोपपत्र दिया जा चुका है।

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राज्य सरकार ने निलंबन के कारण में स्पष्ट किया है कि दुर्गा ने 27 जुलाई को गौतमबुद्ध नगर के ग्राम कादलपुर में निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार गिराने के लिए विधिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इस घटना से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका के चलते उन्हें निलंबित किया गया है।

कांग्रेस और सपा आमने-सामने
दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मामले में सपा और कांग्रेस आमने सामने आ गई हैं।

इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी चिट्ठी के बाद हरकत में आई केंद्र सरकार ने मामले में रविवार को तीसरा रिमाइंडर भेज उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल जवाब तलब किया, जिसके बाद राज्य सरकार ने दुर्गा शक्ति के निलंबन मसले पर केंद्र को जवाब भेज दिया है।

वहीं, केंद्र के मामले में बार-बार रिमाइंडर भेजने से सपा और नाराज हो गई है। पार्टी ने खाद्य सुरक्षा विधेयक का समर्थन न करने और जरूरत पड़ने पर इसके खिलाफ मतदान करने की घोषणा कर इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी
सोनिया की प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी के ठीक एक दिन बाद प्रधानमंत्री कार्यालय हरकत में आ गया। कार्मिक मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर इस प्रकरण की रिपोर्ट मांगी। पत्र में आईएएस एसोसिएशन की शिकायत का हवाला देते हुए इस पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी गई।

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कार्मिक मंत्रालय के रिपोर्ट तलब करने से नाराज सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि राजा (अखिलेश यादव) जो करता है, ठीक करता है। केंद्र के पत्र को औचित्यहीन बताते हुए अग्रवाल ने कहा कि केंद्र के मन में जो आए करे, हमारे लिए इस पत्र का कोई महत्व नहीं है।

उन्होंने कहा कि सोनिया पहले केंद्र के घोटालों पर ध्यान दें। उन्होंने आईएएस एसोसिएशन को चापलूस संगठन करार दिया। इसके साथ ही यह भी कहा कि सपा खाद्य सुरक्षा विधेयक का किसी कीमत पर समर्थन नहीं करेगी। जरूरी हुआ तो इसके खिलाफ संसद में मतदान भी करेगी।

भाजपा ने भी सपा के सुर में सुर मिलाया
भाजपा ने भी सपा के सुर में सुर मिलाया है। पार्टी के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सोनिया को न केवल अशोक खेमका मामले में इसी प्रकार पत्र लिखना चाहिए था, बल्कि अन्य कांग्रेसी सूबे के मुख्यमंत्रियों को भी लिखना चाहिए, जहां ईमानदार अधिकारियों को निलंबन और स्थानांतरण की सजा मिली है।
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