अवैध बालू खनन करने वालों से लोहा लेने वाली एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल को सस्पेंड करने वाली यूपी सरकार ने आखिरकार कबूल कर लिया है कि राज्य में अवैध खनन का गोरखधंधा जोरों पर चल रहा है।
बुधवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के समक्ष प्रदेश सरकार ने झिझकते हुए स्वीकार किया उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से बालू खनन का काम हो रहा है और गौतम बुद्ध नगर जिले में तो एक बार भी पर्यावरणीय क्लीयरेंस नहीं ली गई।
उत्तर प्रदेश सरकार के वकील और राज्य के मुख्य सचिव ने कहा, ‘हमने अभी तक किसी को नहीं पकड़ा है। वहां उनकी मनमानी चलती है। हां अवैध बालू खनन हो रहा है।’
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पीठ ने गौतम बुद्ध नगर के उपायुक्त और एसपी को 29 अगस्त को निजी तौर पर पेश होने को निर्देश दिया है।
पीठ ने कारण बताओ नोटिस जारी कर इनसे पूछा है कि अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई न करने के चलते आपके खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
पीठ ने कहा, ‘हमारे समक्ष रखे दस्तावेजों से साफ है कि नोएडा के गौतम बुद्ध नगर में अंधाधुंध बालू खनन जारी है। हमें उम्मीद थी कि उपायुक्त और एसपी ट्रिब्युनल के पांच अगस्त के और सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेश का पालन करेंगे। लेकिन दोनों ही आदेश का पालन करने में दोनों विफल रहे। अगली सुनवाई पर दोनों को निजी तौर पर पेश होना होगा।’
करीब एक घंटे चली सुनवाई के दौरान पीठ ने ट्रिब्युनल के किसी भी वकील और आम नागरिक को अवैध खनन से जुड़े लोगों की जानकारी देने की स्वतंत्रता दी है।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने शुरू में आरोपों का खंडन किया, लेकिन जब पीठ ने मीडिया रिपोर्ट को पेश किया, तो वकील को अवैध खनन की बात स्वीकार करनी पड़ी।
समुद्र तट पर रेत खनिज खनन पर रोक
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने तमिलनाडु और केरल में समुद्र तट पर रेत खनिज खनन पर रोक लगा दी है। एनजीटी बार एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट राज पंजवानी की याचिका में दोनों राज्यों में बीच पर अनाधिकृत खनन का मुद्दा उठाया था। ट्रिब्युनल ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को 29 अगस्त तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।