उत्तर प्रदेश के कुंडा में डीएसपी हत्याकांड को लेकर यूपी विधानसभा से लेकर दिल्ली में संसद तक सपा का चौतरफा घेराव किया गया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को दो टूक कहा कि जब तक डीएसपी जियाउल हक के हत्यारों की गिरफ्तारी पर सरकार आश्वासन नहीं देती सदन चलने नहीं दिया जाएगा।
वहीं, इस मुद्दे पर संसद में बसपा और सपा के बीच घमासान इतना बढ़ा कि दोनों सदनों की कार्यवाही ठप हो गई। बसपा सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया।
वहीं, दिल्ली में बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो सीधे मुलायम सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुलायम उत्तर प्रदेश चलाने में तो सक्षम नहीं हैं और अब वह देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।
डीएसपी हत्याकांड में राजा भैया के इस्तीफे को दिखावा बताते हुए मायावती ने कहा कि यूपी सरकार राजा भैया को बचाना चाहती है।
बसपा महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी कहा है कि जब तक इस मामले में नामजद पूर्व मंत्री राजा भैया की गिरफ्तारी नहीं हो जाती है, विधानसभा और विधान परिषद नहीं चलने दी जाएगी।
वहीं, प्रदेश के मंत्री आजम खां ने बसपा पर शव पर सियासत करने का आरोप जड़ा है। मंगलवार को लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही बसपा सांसद दारा सिंह चौहान तथा शफीकुर्रहमान बर्क अपनी सीट से खड़े हो गए और उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदतर हो चुकी है, इसलिए केंद्र को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
बाद में वे पार्टी के अन्य सांसदों के साथ नारेबाजी करते हुए आसन के सामने जाकर खड़े हो गए। विरोध में सपा सांसद भी जोर-जोर से बोलने लगे। हंगामे के चलते पहले एक घंटे के लिए फिर पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। हंगामे की यही स्थिति राज्यसभा में भी थी।
बसपा और सपा सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के चलते कई बार के बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। मालूम हो कि सोमवार को भी पेट्रोल की कीमतों को लेकर विपक्ष के हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही नहीं चल पाई थी।
सिर्फ एक गोली लगी सीओ को
एडीजी कानून-व्यवस्था अरुण कुमार के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया है कि सीओ कुंडा जियाउल हक को सिर्फ एक गोली मारी गई थी। तीन गोलियां मारे जाने की बात गलत है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीओ को पीछे से गोली मारी गई जो सीना चीर कर बाहर निकल गई। जियाउल हक के शरीर पर इसके अलावा सिर्फ ऊपरी चोट के निशान पाए गए हैं।
सभी मामले सीबीआई को
एडीजी कानून-व्यवस्था अरुण कुमार व गृह सचिव राकेश के मुताबिक राज्य सरकार ने इस मामले में दर्ज सभी चार मुकदमों की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी गई है। इनमें एक मुकदमा सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन ने, दूसरामुकदमा हथिगवां थाने के प्रभारी ने, तीसरा मुकदमा घटना में मारे गए प्रधान नन्हे के भाई ने और चौथा मुकदमा में मारे गए सुरेश यादव के भाई द्वारा दर्ज कराया गया है।
पत्नी व भाई को नौकरी पर विचार
गृह सचिव राकेश कुमार ने इस बात की पुष्टि की कि सीओ की पत्नी व भाई को नौकरी देने की कवायद चल रही है । उन्होंने बताया कि सीओ की पत्नी परवीन आजाद और इंटर में पढ़ रहे जियाउल हक के भाई का बॉयोडाटा व दरख्वास्त ले लिए गए हैं। सरकार इनका परीक्षण कर रही है। अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि किस पद के लिए विचार हो रहा है।
सम्मानजनक नौकरी मिली तो करूंगी: डॉ. परवीन
शहीद जियाउल हक की पत्नी डॉ. परवीन को अपना और अपने परिवार की सुरक्षा का भय सता रहा है। वह अपने को असुरक्षित महसूस कर रहीं हैं। कहा, सम्मानजनक नौकरी मिली तो कर लूंगी नहीं तो मेडिकल की पढ़ाई पूरी करूंगी। चर्चा में आने के लिए मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया था। मैं चाहती थी कि ज़ियाउल के घावों को मुख्यमंत्री स्वयं देख लें। खतरे के बावजूद न्याय के लिए आवाज उठाना बंद नहीं करूंगी ताकि फिर कोई इस तरह की घटना का शिकार न हो।