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यूपी के टीपू ने उठाई 'तलवार', हमला केजरीवाल पर

Fri, 07 Mar 2014 11:47 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को इस बात का अहसास है कि मुजफ्फरनगर दंगों में हुई फजीहत आगामी लोकसभा चुनावों में उनका सिरदर्द बन सकती है।
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ऐसे में वो हर मुमकिन मंच पर सफाई पेश कर रहे हैं। दंगों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को हरमुमकिन राहत पहुंचाने का दावा कर रहे हैं। साथ ही अपने पिता और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की डांट के मायने भी समझा रहे हैं।

लेकिन इस बीच उन्हें यह भी पता है कि बचाव की मुद्रा में आने से बात नहीं बनेगी। भाजपा पर तेवर तल्ख, कांग्रेस को लेकर नपा-तुला बयान एक तरफ, दूसरी ओर उन्होंने उत्तर प्रदेश की सियासत में जगह बनाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी पर अपना निशाना साध दिया है। अब तक सपा अरविंद केजरीवाल पर कुछ खास नहीं बोल रही थी, लेकिन अब उसने अपनी सियासी बंदूकों का मुंह खोल दिया है।
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आम आदमी पार्टी पर करारा हमला

दिल्ली के एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर तो हमला बोला, साथ ही आम आदमी पार्टी और उसकी नीतियों को भी नहीं बख्‍शा।

उन्होंने बुधवार शाम दिल्ली में भाजपा और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़पों पर भी चुटकी ली। और दिल्ली को गुंडों की राजधानी करार दिया।

हालांकि, जब-जब उनसे पूछा गया कि समाजवादी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं पर आए दिन गुंडई करने के इल्जाम लगते रहते हैं, तो वह सफाई देने में काफी दिक्कत महसूस करते दिखे।

'हमारी नकल करते हैं अरविंद केजरीवाल'

राम मनोहर लोहिया के आदर्शों पर खड़ी पार्टी गुंडागर्दी क्यों करती है, इस पर अखिलेश ने कहा,  "ऐसा नहीं है। हम लोहियाजी के आदर्शों को पूरी तरह समझते हैं और उनका पालन करते हैं। लेकिन मीडिया अगर सिर्फ एक पक्ष की खबरें दिखाएगा, तो नकारात्मक छवि बनने का डर रहता है।"

उन्होंने कहा, "एक पार्टी हमा़रे पड़ोस में इन दिनों राम मनोहर लोहिया की नकल कर रही है। सबसे पहले उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को झाड़ू से साफ कर दिया जाना चाहिए। दूसरों ने इसकी नकल की।" जाहिर है, उनका इशारा आम आदमी पार्टी की तरफ था, जिसने दिल्ली में कांग्रेस पर हमला बोला।

अरविंद केजरीवाल पर अखिलेश का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने कहा, "दिल्‍ली में पानी मुफ्त हुआ, तो देश और दुनिया भर के मीडिया ने दिखाया। लेकिन उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए नहर का पानी, ट्यूबवेल का पानी फ्री कर दिया, कोई खबर नहीं बनती।"

'दिल्ली तो गुंडों की राजधानी है'

जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सामने यह बात रखी गई कि उनके अपने कार्यक्रमों में कार्यकर्ता भिड़ जाते हैं, तो उन्होंने कहा, "यह घटना हुई, इससे इनकार नहीं है। लेकिन हम कार्रवाई भी तुरंत करते हैं, जिसकी खबर नहीं दिखाई जाती।"

उन्होंने कहा, "लेकिन यूपी में चीजों को अलग तरीके से दिखाया जाता है। कल (बुधवार) दिल्ली में दो पार्टी के लोगों के बीच जमकर हिंसा हुई, पत्‍थर फेंके गए, कुर्सियां चलीं। लेकिन किसी ने इसे गुंडों की लड़ाई नहीं बताया।"

अखिलेश ने कहा, "हमारे कार्यकर्ताओं के बीच झड़प होती है, तो उन्हें गुंडा कहा जाता है। जब दिल्ली में दो दलों के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट होती है और पूरा देश देखता है, तो उन्हें गुंडा नहीं कार्यकर्ता कहा जाता है। और ये वे लोग हैं, जो खुद को बुद्ध‌िजीवी कहते हैं।" इस पर जब यह कहा गया कि गुंडे तो सिर्फ यूपी में होते हैं, तो सीएम ने कहा, "दिल्ली तो गुंडों की राजधानी है।"

'मैं सियासत में आया अपनी शादी के कारण'

हल्के-फुल्के सवालों का जवाब भी अखिलेश यादव ने पूरी संजीदगी से दिया। जब उनसे पूछा गया कि ऐसी कौन सी घटना है, जिसकी वजह से उनकी एंट्री सियासत में हुई, तो उन्होंने कहा, "यह मेरी शादी है।"

उत्तर प्रदेश के सीएम ने कहा, "ऐसा कहा जाता है कि शादी किस्मत के दरवाजे खोल देती है। नवंबर में मेरी शादी हुई थी और फरवरी में मैं सांसद बन गया था।"

इसे जोड़कर जब परिवारवाद वाली राजनीति पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी में संघर्ष का परिवारवाद है, सत्ता का परिवारवाद नहीं है। मैंने अपनी पत्नी को लड़ाया, पहली बार वो हार गईं, लेकिन दूसरी बार निर्विरोध जीत गईं।"

'नेताजी का मिजाज कभी-कभी पता नहीं चलता'

अखिलेश यादव से यह सवाल भी किया गया कि वह अपने पिता और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को 'नेताजी' कहकर क्यों पुकारते हैं। इस पर उन्होंने कहा, "क्योंकि वह हमारी पार्टी के अध्यक्ष हैं, नेताजी हैं। अगर मैं उन्हें पिताजी कहूंगा, तो पार्टी कार्यकर्ताओं में सही संदेश नहीं जाएगा। वो कनफ्यूज हो सकते हैं।"

मुलायम के उन्हें खुलेआम डांटने पर टीपू बोले, "ऐसा कौन सा बच्चा है, जिसे कभी पिता से डांट नहीं पड़ी।" लेकिन क्या यह डांट अकेले में नहीं मारी जानी चाहिए, ऐसा सभी के सामने क्यों किया गया।

इसका जवाब अखिलेश ने मुस्कुराहट के साथ दिया। उन्होंने कहा, "मुझे पता था कि यह सवाल पूछा जाएगा, इसलिए मैं पहले भी कह चुका हूं क‌ि मुझे खुद समझ नहीं आता कि कब वो पार्टी अध्यक्ष के तौर पर पेश आते हैं और कब मेरे पिता के रूप में।"
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कांग्रेस को अखिलेश का होली गिफ्ट!

उत्तर प्रदेश के सीएम से जब इस बारे में राय मांगी गई कि मनमोहन सिंह के बाद अगर सपा को अपना प्रधानमंत्री बनाने का मौका मिलता है, तो वह केंद्र में कौन सी नीतियों को तरजीह देंगे। उन्होंने सीटों की ताकत की बात सामने रखी।

उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री बनने की रेस में नहीं हूं। उत्तर प्रदेश का काम संभालना है। और हम यह जानते हैं कि पीएम पद के लिए सीटें चाहिए, जो हमारे पास नहीं हैं। यूं हर पार्टी चाहती है कि उसका पीएम बने, ऐसे में हम भी चाहते हैं कि किसी समाजवादी को यह मौका मिले।" शायद इशारा अपने पिता की तरफ था, जो कई बार पीएम बनने की हसरत जता चुके हैं।

कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी के रिश्तों को उन्होंने एक लाइन में कुछ इस तरह बयान किया, "यह बात तय है कि कांग्रेस जब सबसे ज्यादा कमजोर होगी, तो समाजवादी उसके सबसे अच्छे दोस्त सा‌बित होंगे।"
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