यूं तो उन्हें किसी से डर नहीं है। आधी बांह वाले कुर्ते पहन कर वो रैलियों में शेर की तरह गरजते हैं लेकिन सच्चाई यही है कि नरेंद्र मोदी वन टू वन यानी सीधे इंटरव्यू के नाम पर चूहे की तरह दुबक जाते हैं। इस बात को और बल मिल गया जब मोदी ने फेसबुक पर एक लाइव चैट में भाग लेने इनकार कर दिया।
ये पहला वाकया नहीं है जब मोदी इंटरव्यू से बचे हों। 2007 में सीएनएन-आईबीएन के करण थापर के साथ मोदी का इंटरव्यू मजह तीन मिनट तक चल पाया क्योंकि मोदी बीच में ही इंटरव्यू छोड़कर चले गए। इससे पहले सन 2011 में एनडीटीवी के विजय त्रिवेदी ने भी मोदी का साक्षात्कार करना चाहा लेकिन ड्रिंक ब्रेक के बहाने से मोदी ने इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया।
एक सप्ताह पहले मोदी ने दैनिक जागरण को इंटरव्यू दिया था। शायद पहले से तय था कि उनसे वो ही सवाल पूछे जाएं जिनके जवाब देने में मोदी सहज हों। इसलिए वो इंटरव्यू इतनी खास चर्चा बटोर नहीं पाया।
सवाल उठता है कि ऐसे कौन से सवाल हैं जो मोदी को असहज कर सकते हैं। मोदी को असहज करने वाले सवाल अगर उठे तो मोदी क्या करेंगे?
जसोदा बेन का राज क्या है?
खुद को अविवाहित कहने वाले मोदी पत्रकारों के सामने तब असहज हो जाएंगे जब उनकी पत्नी जसोदाबेन के बारे में पूछा जाएगा।
पत्रकार बिरादरी उनकी कथित पत्नी के घर तक जा चुकी है और उनका इंटरव्यू ला चुकी है।
खैर मोदी से उलट जसोदाबेन मीडिया से घबराती नहीं है और उन्होंने पत्रकारों के सवालों के सधे हुए जबाव दिए।
गुजरात दंगों का जिन्न
मोदी भले ही गुजरात के विकास मॉडल पर घंटों बात कर सकते हैं लेकिन सब जानते हैं कि गुजरात दंगों का जिक्र आते ही वो असहज हो जाते हैं।
अगर पत्रकार इंटरव्यू के दौरान उनसे गुजरात दंगों के संबंध में एक भी सवाल पूछेंगे तो ऐन चुनावों से पहले मोदी के लिए मुंह खोलना असंभव साबित होगा।
गुजरात दंगों में वो अपनी भूमिका का जिक्र वो कर नहीं सकते और मुसलमानों से माफी मांगने से उनका सिक्योर वोट बैंक छिटक सकता है।
तानाशाही का आरोप?
पार्टी में तानाशाही के आरोपों पर निश्चित रूप से मोदी परेशान हो सकते है।
गुजरात भाजपा में उनकी तानाशाही के कई उदाहरण हैं। गुजरात के कई विधायक आरोप लगा चुके हैं कि मोदी उन्हें स्कूल मास्टर की तरह ट्रीट करते हैं।
यही नहीं संघ के आशीर्वाद के चलते मोदी कई बड़े नेताओं को भी अपने सामने कुछ नहीं समझते।
माया को भी लगता है डर
इस लिस्ट में सिर्फ मोदी और राहुल जैसे दिग्गजों के अलावा दलितों की दबंग मसीहा यानी मायावती का नाम भी शामिल है। माया अभी तक टीवी पर इंटरव्यू देने से बचती रही।
तब भी जब काशीराम की खराब तबियत पर काशीराम के परिवार ने माया पर कई तरह के आरोप लगाए। माया चाहती तो इंटरव्यू के जरिए सफाई दे सकती थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मायावती का मानना है कि मीडिया में मनुवादी भरे पड़े है। कहो कुछ, और अगले दिन कुछ और ही छप कर आएगा।
बाद में देते रहे सफाई, जनता की नजर में तो गलत इमेज बन गई ना। इसलिए माया इंटरव्यू देती ही नहीं हैं। रैली और प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी माया लिखा हुआ पढ़ती हैं ताकि बाद में सफाई देने की नौबत न आए।
राहुल का इंटरव्यू याद है आपको
पिछले दिनों एक बड़े अंग्रेजी अखबार के पत्रकार द्वारा लिया राहुल गांधी का इंटरव्यू तो याद होगा आपको। अर्नब गोस्वामी के बेसिक सवालों पर भी कांग्रेस के युवराज बगलें झांकते नजर आए।
उन्होंने यहां तक कह डाला कि हां उन्हें लगता है कि सिख दंगों में कुछ कांग्रेसी भी शामिल थे। अपने जवाबों में राहुल सिस्टम, महिला सशक्तिकरण युवा विकास दोहराते नजर आए।
कहां तो कांग्रेस चाह रही थी कि जनता इंटरव्यू के बाद राहुल की इस बहादुरी पर लट्टू हो जाए। लेकिन हुआ ये कि देश भर में इस इंटरव्यू पर सैंक़ड़ों चुटकुले बन गए।