आसाराम बापू के खिलाफ गवाह अखिल की हत्या मिस्ट्री बन चुकी है। अभी तक की पुलिस की तफ्तीश का हर बिंदु आसाराम प्रकरण की ओर इशारा कर रहा है। अखिल से पहले इंदौर में एक और गवाह वैद्य अमृत प्रजापति की हत्या का पैटर्न भी ऐसा ही था। केस के पीछे ऐसा न जाने क्या था कि पुलिस दो कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई। कमोवेश यही हालात अखिल के मर्डर की जांच के हैं।
संत आसाराम के रसोइए अखिल गुप्ता की हत्या को चार दिन हो चुके हैं। पुलिस की अभी तक की तहकीकात में इशारा आसाराम प्रकरण की ओर ही है। हालांकि पुलिस अफसर दूसरे बिंदुओं को भी खंगालने में जुटे हैं। जिस तरीके से वारदात के बाद पुलिस टीम अहमदाबाद में डेरा डाले हैं, उससे यह साफ है कि गवाह की हत्या का लिंक वहीं से जुड़ा है। अखिल से लूट नहीं हुई, दुकान की नगदी भी स्कूटर में मिली। रंजिश का भी कोई क्लू सामने नहीं आया।
अखिल से पहले इंदौर में आसाराम के खिलाफ गवाह अमृत प्रजापति की हत्या की थ्योरी खंगाली गई तो कई समानताएं मिलीं। मसलन, हत्यारों की संख्या दो ही थी। इंदौर और मुजफ्फरनगर में दोनों जगह वारदात में हत्यारों ने बाइक का ही इस्तेमाल किया। सबसे अहम पहलू यह है कि अमृत को पुलिस सुरक्षा भी मिली हुई थी। सुरक्षा कर्मी खाना खाने चला गया। जैसे ही अमृत क्लीनिक से बाहर आए, एक युवक ने बीमार होने का नाटक कर नजदीक से गोली मार दी। कई दिन अस्पताल में जद्दोजहद के बाद घायल अमृत ने दम तोड़ दिया था। पुलिस इस मामले में अभी तक कातिलों तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसी ही स्थिति फिलहाल अखिल गुप्ता केस में दिखाई देती है।
अधिकारिक तौर पर पुलिस अफसर भले ही कुछ न कहें, लेकिन उनका इशारा यह भी है कि हो सकता है कि दोनों गवाहों की हत्याओं में एक ही शूटर इस्तेमाल किए गए हों। अहमदाबाद गई पुलिस की टीम से भी अधिकारियों को फिलहाल कोई पुख्ता जानकारी हाथ नहीं लगी है। सूरत की दो बहनों से यौन उत्पीड़न के मामले में अखिल के साथ ही इंदौर का अमृत प्रजापति भी सरकारी गवाह था।