यूपी में बागपत के जिला अस्पताल में ड्यूटी के प्रति घोर लापरवाही बरती गई, जिससे मानवता तार तार हो गई... यह आरोप इलाज के लिए भटक रहे किसी मरीज का नहीं बल्कि सीएमओ डाक्टर मुंशीलाल का है। उन्होंने दो महिला डाक्टरों श्वेता यादव और अंजू बाला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए बाकायदा थाना पर तहरीर दी। आरोप है कि एक नवंबर को जिला अस्पताल आई सात साल की रेप पीड़ित बच्ची का मेडिकल परीक्षण करने के लिए दो महिला चिकित्सकों ने साफ इंकार कर दिया। तहरीर ने जबरदस्त हड़कंप मचा दिया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि एक तो पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। दूसरा बाद में सीएमओ ने भी तहरीर वापस ले ली।
रेप की वारदात 31 अक्तूबर को हुई थी। पीड़ित बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला चिकित्सालय रेफर किया गया था। सीएमओ का कहना है कि वहां डाक्टर श्वेता यादव ने उसका मेडिकल करने से साफ इंकार कर दिया। इस पर पीड़ित बच्ची का परिवार उनके पास आया। उन्होंने अपने चपरासी बट्टूलाल को भेजा। वहां डॉक्टर अंजू बाला यादव मिलीं। उन्होंने भी मेडिकल करने से मना कर दिया। सीएमओ ने यह तहरीर आठ नवंबर को दी। इस पर बागपत थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण मुरारी दोहरे ने एफआईआर लिखने की जगह दरोगा को जांच करने के लिए जिला अस्पताल भेजा। जांच पूरी होने से पहले ही सीएमओ ने 11 नवंबर को तहरीर वापस ले ली।
अपनी-अपनी बात
दोनों डाक्टरों ने गलती की है, इसलिए मैंने तहरीर दी थी। लेकिन डॉक्टरों की गुजारिश पर वापस ले ली। डॉ. मुंशीलाल (सीएमओ)
महिला डॉक्टरों ने कोई गलती नहीं की। पीड़ित बच्ची का मेडिकल जिला अस्पताल में ही हुआ है - डॉ. बीएल कुशवाहा (सीएमएस)
तहरीर में लगाए गए आरोप पूरी तरह से गलत हैं, पीड़ित बच्ची का मेडिकल मैंने ही किया है - डॉ. अंजू बाला।
सीएमओ की तहरीर पर जांच शुरू कराई थी, लेकिन बाद में तहरीर वापस ले ली गई - कृष्ण मुरारी दोहरे (इंस्पेक्टर, बागपत कोतवाली)
सीएमओ गलत या जिला अस्पताल
सीएमओ का जिला अस्पताल के डाक्टरों के खिलाफ तहरीर देना बड़ी बात है, लेकिन इससे ज्यादा आश्चर्यजनक रहा तहरीर का वापस ले लेना। सवाल यह उठ रहा है कि क्या उनका मकसद जिला अस्पताल पर दबाव बनाने का था? इन दिनों सीएचसी-पीएचसी के डाक्टरों की पोस्टमार्टम ड्यूटी न लगाने को लेकर सीएमओ और सीएमएस में ठनी हुई है। दूसरा सवाल यह है कि इस प्रकरण में या तो तहरीर देने वाले सीएमओ गलत हैं या फिर दोनों महिला डाक्टर? सवाल यह भी है कि एक नवंबर की घटना पर तहरीर आठ नवंबर को क्यों दी गई?