वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों का दावा है कि केदारनाथ में आई भयंकर तबाही के पीछे एक नहीं बल्कि दो प्राकृतिक आपदाओं का हाथ रहा।
मेल टुडे की खबर की अनुसार 17 जून को आई तबाही से लगभग 12 घंटे पहले 16 जून को शाम 5:15 बजे भारी बारिश हुई थी। इससे सरस्वती और दूध गंगा में बाढ़ आ गई थी। इसकी वजह से छोटी नदियों और झरनों का जलस्तर काफी बढ़ गया था।
जब पहले ही था तबाही का अंदेशा तो ध्यान क्यों नहीं दिया?
इस बारिश के कारण अतिरिक्त जल से नदियों में तीव्र कटाव शुरू हो गया। अथाह पानी की वजह से केदारनाथ के ऊपरी हिस्सों में भयंकर तबाही मची। ऊपरी हिस्सा बर्बाद हो गया।
बदरीनाथ के ऊपर ‘नई झील’ मचा सकती है तबाही...
फिर दूसरी तबाही 17 जून की सुबह 6:45 बजे आई। भारी बारिश के कारण चोराबारी झील का जल स्तर अचानक बढ़ गया, उसके बांध टूट गए, जिससे केदारनाथ में दूसरी बार बाढ़ आई। उसमें मंदिर को छोड़कर सबकुछ बह गया और हजारों जिंदगियां तबाह हो गईं।
इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने करंट साइंस पत्रिका के हालिया प्रकाशन में केदारनाथ आपदा के कारणों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है।